लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। ये अभ्यर्थी बसपा प्रमुख मायावती के आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने उनकी भर्ती मामले की सही पैरवी नहीं की। उनका कहना है कि इसी वजह से उन्हें पिछले पांच साल से नियुक्ति नहीं मिल पा रही है, जिससे उनका करियर ठप हो गया है।
अभ्यर्थियों ने अपने मुद्दे को लेकर मायावती से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बसपा प्रमुख इस मामले में कदम उठाएंगी, तो उनकी भर्ती प्रक्रिया में देरी खत्म हो सकती है। अभ्यर्थी आश्वस्त हैं कि राजनीतिक हस्तक्षेप से उनकी उम्मीदें अब जीवित रह सकती हैं।
प्रदर्शन के दौरान मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स और पीएसी तैनात की गई है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शन स्थल के आसपास भी विशेष निगरानी बढ़ा दी है, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
अभ्यर्थियों का प्रदर्शन शनिवार से लगातार जारी है। इससे पहले उन्होंने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का भी घेराव किया था। मंत्री के आवास के बाहर भी बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात था, लेकिन अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जताया।
प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समर्थन में हाथ में पोस्टर और बैनर लिए हुए हैं, जिन पर उन्होंने लिखा है कि “नियुक्ति के बिना हमारा भविष्य अधूरा है।” अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में उचित पैरवी नहीं होने के कारण ही यह लंबित मामला आज तक हल नहीं हो पाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रदर्शन से न केवल शिक्षक भर्ती का मुद्दा सुर्खियों में आया है, बल्कि यह राज्य सरकार के लिए भी एक दबाव का मुद्दा बन गया है। सरकार को जल्द ही इस मामले में ठोस कार्रवाई करनी होगी, ताकि लंबे समय से परेशान अभ्यर्थियों की मांगें पूरी हो सकें।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सभी की नजरें बसपा प्रमुख मायावती पर टिकी हुई हैं। अभ्यर्थी उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी गुहार सुनी जाएगी और सुप्रीम कोर्ट में सही पैरवी के जरिए उनकी भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
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