मुंबई की मशहूर हाजी अली दरगाह के पास सालों से अंगूठियां बेचने वाला जलालुद्दीन उर्फ छांगुर अब एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाले मामले में मुख्य आरोपी बनकर सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि जलालुद्दीन दरअसल एक संगठित धर्मांतरण रैकेट का मास्टरमाइंड है, जो सुनियोजित तरीके से हिंदू लड़कियों के जबरन या बहलाकर किए जा रहे धार्मिक परिवर्तन की साजिश चला रहा था। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जलालुद्दीन ने जाति आधारित ‘रेट लिस्ट’ तैयार की थी, जिसमें ब्राह्मण और क्षत्रिय समुदाय की लड़कियों के लिए 15 से 16 लाख रुपये तक की कीमत तय की गई थी।
ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, जलालुद्दीन ने धर्मांतरण को एक व्यवस्थित “बिजनेस मॉडल” की तरह विकसित किया था। जिस तरह से होटलों में रूम के लिए रेट कार्ड और टारगेट दिए जाते हैं, ठीक वैसे ही इस नेटवर्क में लड़कियों को टारगेट करने के लिए ‘क्लासिफिकेशन चार्ट’ और ‘रेट स्लैब’ बनाए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, लड़कियों को पहले प्रेम जाल में फंसाया जाता, फिर मानसिक और सामाजिक दबाव बनाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता। इस रैकेट की कार्यप्रणाली बेहद पेशेवर और खतरनाक थी। एजेंसियों के मुताबिक, जलालुद्दीन के साथ एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था जो न केवल मुंबई, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली तक फैला हुआ था। यह गिरोह मुख्य रूप से धार्मिक भावनाओं के नाम पर आर्थिक लेन-देन करता था और उसे “धर्म सेवा” का नाम देकर वैध ठहराने की कोशिश करता था।
जातिगत भेदभाव और धार्मिक असहिष्णुता को हथियार बनाकर इस नेटवर्क ने सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर चोट पहुंचाई है। जलालुद्दीन ने जानबूझकर उच्च जाति की लड़कियों को टारगेट किया ताकि समाज में अधिक प्रभाव पड़े और उसके धर्मांतरण एजेंडे को वैचारिक मजबूती मिल सके …ईडी को जांच में यह भी पता चला है कि रैकेट में शामिल लड़कों को बाकायदा प्रशिक्षित किया जाता था कि कैसे टारगेट लड़की से संपर्क करना है, कैसे उसे भरोसे में लेना है और अंततः कैसे उसे अपने धर्म में शामिल करना है। धर्मांतरण के बाद वीडियो बनवाकर उसे “सबूत” के तौर पर रखा जाता था, जिससे लड़की के लिए पीछे हटना मुश्किल हो जाए। इस पूरे मामले ने न सिर्फ राज्य सरकार बल्कि केंद्र की एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है। जलालुद्दीन को फिलहाल हिरासत में लेकर उससे गहन पूछताछ की जा रही है और उसके नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
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यह मामला इस बात की कड़ी चेतावनी है कि धार्मिक आज़ादी के नाम पर देश में कैसे संगठित तरीके से षड्यंत्र रचे जा रहे हैं, जिनका मकसद समाज को तोड़ना और सामाजिक संतुलन को बिगाड़ना है। यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संरचना से भी जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। अधिकारियों के अनुसार, जलालुद्दीन के बैंक खातों और लेन-देन की भी जांच की जा रही है, जिससे यह पता चल सके कि धर्मांतरण के नाम पर कितना काला धन खपाया गया और क्या इस रैकेट के पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय फंडिंग या संगठन भी शामिल हैं। देश में जिस तरह से धर्मांतरण को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, यह मामला एक चेतावनी है कि अब समय आ गया है जब इस तरह के रैकेट के खिलाफ सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जाए — ताकि समाज की बुनियाद को किसी भी कीमत पर कमजोर न होने दिया जाए।
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