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Homeधर्म और आस्था(Dharma-Karma)उत्तराखंड में 'ऑपरेशन कालनेमी'

उत्तराखंड में ‘ऑपरेशन कालनेमी’

उत्तराखंड जैसे धार्मिक और तीर्थ स्थलों से समृद्ध प्रदेश में, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान, चारधाम यात्रा और धार्मिक आयोजनों के लिए पहुंचते हैं, वहीं कुछ असामाजिक तत्व भी इस श्रद्धा का लाभ उठाने में पीछे नहीं रहते। इसी पृष्ठभूमि में उत्तराखंड पुलिस ने हाल ही में “ऑपरेशन कालनेमी” नामक एक विशेष अभियान की शुरुआत की है, जिसका मकसद धर्म की आड़ में लोगों को ठगने वाले फर्जी बाबाओं को बेनकाब कर कानून के शिकंजे में लाना है। इस ऑपरेशन का नाम ही प्रतीकात्मक है — “कालनेमी”, रामायण का वह पात्र जो राक्षस होते हुए भी साधु का वेश धरकर श्रीराम के मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है। इसी प्रकार, ये फर्जी बाबा भी साधु-संतों का चोला पहनकर मासूम श्रद्धालुओं को गुमराह कर रहे थे।

ऑपरेशन के पहले ही दिन उत्तराखंड पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी जब देहरादून और हरिद्वार जैसे बड़े धार्मिक शहरों से कुल 38 फर्जी बाबा पकड़े गए। हैरानी की बात यह रही कि इन पकड़े गए लोगों में एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल है, जो अवैध रूप से भारत में रहकर ठगी के धंधे में लिप्त था। ये सभी लोग संत-महात्माओं की वेशभूषा में घूमते थे, लेकिन इनका असली उद्देश्य धर्म के नाम पर दान, दक्षिणा और चढ़ावे के रूप में धन की अवैध उगाही करना था। कई तो झाड़-फूंक, तांत्रिक विद्या और चमत्कारी इलाज के नाम पर भोले-भाले श्रद्धालुओं को मानसिक और आर्थिक रूप से शोषित कर रहे थे।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इन लोगों का कोई धार्मिक या आध्यात्मिक प्रशिक्षण नहीं था, बल्कि कुछ मामलों में तो वे आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए थे। ये लोग सार्वजनिक स्थलों, मंदिरों के बाहर और यहां तक कि घाटों पर बैठे पाए गए जहां श्रद्धालु सहज विश्वास के साथ उनसे संपर्क करते थे। यह धोखाधड़ी केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि आस्था के साथ विश्वासघात भी है, जो समाज के मूल धार्मिक ताने-बाने को क्षति पहुंचाता है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अवैध प्रवेश (फॉरेन एक्ट) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और विस्तृत पूछताछ जारी है।

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उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि यह अभियान सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में इसे और व्यापक रूप में चलाया जाएगा। खासकर चारधाम यात्रा मार्गों, हरिद्वार, ऋषिकेश, काशीपुर, उत्तरकाशी और नैनीताल जैसे धार्मिक केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति को बाबा या साधु मानने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच कर लें और किसी भी प्रकार की ठगी या अनैतिक व्यवहार की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

“ऑपरेशन कालनेमी” न सिर्फ फर्जी बाबाओं की पोल खोलने का माध्यम बन रहा है, बल्कि यह समाज के सामने एक अहम संदेश भी दे रहा है कि आस्था अंधविश्वास में न बदले और धर्म के नाम पर चल रही ठगी की दुकानों को बंद किया जाए। उत्तराखंड जैसे धार्मिक राज्य में यह कदम आस्था की रक्षा के लिए एक साहसी और सराहनीय पहल है, जो यह दिखाता है कि सच्चे संतों और साधुओं की गरिमा बनाए रखने के लिए नकली चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है

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