रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में भारत और चीन की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स (BRICS) समूह की नींव इन दोनों देशों ने रखी है और यही इसकी ताकत का मुख्य कारण है। उनका मानना है कि भारत और चीन किसी बाहरी दबाव में नहीं आते और अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेते हैं।पुतिन ने विशेष रूप से भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत ने रूस से तेल की खरीदारी जारी रखी। यह भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है। उनकी इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी राष्ट्रीय हितों और रणनीति के आधार पर निर्णय लेता है
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और चीन जैसी स्वतंत्र नीतियां रखने वाली शक्तियां न्यायपूर्ण और संतुलित दुनिया बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। पुतिन की इस बात से संकेत मिलता है कि रूस ऐसे देशों की नीति का समर्थन करता है जो किसी के दबाव में नहीं आते।पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की। उन्होंने मोदी की विदेश नीति और रणनीतिक निर्णयों को महत्वपूर्ण बताया। यह दर्शाता है कि रूस भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है।
इसके साथ ही पुतिन ने अमेरिका को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका देशों पर टैरिफ या आर्थिक दबाव डालता है, तो यह अंततः खुद उसके लिए नुकसानदेह साबित होगा। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय आर्थिक राजनीति में रूस के दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है।
इस पूरी चर्चा से यह साफ है कि रूस भारत और चीन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत और स्वतंत्र देशों के रूप में देखता है। पुतिन की टिप्पणियां न केवल भारत की नीति की प्रशंसा करती हैं, बल्कि अमेरिका को भी यह संदेश देती हैं कि स्वतंत्र निर्णय लेने वाले देशों पर दबाव डालना आसान नहीं है
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