उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से ही अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। “अपराध और अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस” की नीति आज यूपी पुलिस की पहचान बन चुकी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते आठ वर्षों में प्रदेश में 15,000 से अधिक पुलिस एनकाउंटर किए जा चुके हैं। इनमें से 256 से ज़्यादा खूंखार अपराधी मारे गए, जबकि 31,960 अपराधी गिरफ्तार किए गए। इतना ही नहीं, 10,324 अपराधी गोलीबारी में घायल हुए और सैकड़ों ने पुलिस के डर से आत्मसमर्पण किया।
इन कार्रवाइयों के दौरान पुलिस ने भी बड़ी कीमत चुकाई है। 18 बहादुर पुलिसकर्मी शहीद हुए जबकि 1,754 जवान घायल हुए। बावजूद इसके, पुलिस का मनोबल कम नहीं हुआ है। सरकार और पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह अभियान “कानून के राज” को स्थापित करने के लिए जारी रहेगा।
एनकाउंटर के आंकड़ों में मेरठ जोन सबसे आगे है, जहां अकेले 4,453 एनकाउंटर हुए और 85 अपराधी मारे गए। इसके बाद वाराणसी जोन और आगरा जोन आते हैं, जहां क्रमशः 27 और 22 अपराधी ढेर किए गए।
पिछले 20 दिनों में ही एक दर्जन से अधिक एनकाउंटर हुए हैं — जो इस बात का संकेत हैं कि सरकार का “अपराध खत्म करने का मिशन” अब और तेज़ हो गया है।
इसी के साथ “मिशन शक्ति” के तहत महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वालों पर भी शिकंजा कसने की कार्रवाई जारी है। महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार पर नकेल और गैंगस्टर एक्ट के तहत ज़ब्त की गई अरबों की संपत्तियों ने यह साबित कर दिया है कि योगी सरकार का अभियान सिर्फ़ शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीन पर दिखने वाला परिणाम है।
सरकार का स्पष्ट संदेश है —
“अपराधी या तो जेल में होंगे या प्रदेश छोड़ देंगे।”
और यही संदेश आज उत्तर प्रदेश के हर जिले में कानून व्यवस्था का चेहरा बदल रहा है।
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
