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इमरान खान जेल की चारदीवारी में बंद एक नाम, लेकिन बाहर पूरी दुनिया उनकी साँसों पर नजरें गड़ाए बैठी है।

पाकिस्तान की राजनीति इन दिनों एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ सच्चाई, सत्ता और साज़िश की लकीरें धुंधली होती जा रही हैं। इसी बीच अदियाला जेल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हलकों में भी हलचल मचा दी है। कई दिनों से अफवाहें फैल रही थीं कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ज़िंदा हैं भी या नहीं लेकिन इन अटकलों पर उनकी बहन डॉ. उजमा खान ने खुद सामने आकर जवाब दिया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को जेल प्रांगण में हुई 20 मिनट की मुलाक़ात में इमरान खान ने साफ कहा कि उनकी जान को गंभीर खतरा है, और उन पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

पीटीआई की ओर से जारी बयान के अनुसार इमरान खान का दावा है कि सैन्य प्रतिष्ठान अब उनके खिलाफ हर तरीका इस्तेमाल कर चुका है मुकदमे, गिरफ्तारी, राजनीतिक तोड़फोड़, मीडिया ब्लैकआउट, धमकियाँ और अब उन्हें यह डर है कि उनके साथ शारीरिक रूप से कुछ बड़ा और खतरनाक करने की साज़िश चल सकती है। उनका कहना है कि उनके पास ऐसा “सबूत और संकेत” हैं जो बताते हैं कि अब अगला कदम उन्हें हमेशा के लिए चुप कराना हो सकता है।

डॉ. उजमा खान ने मुलाक़ात के बाद कहा कि इमरान खान “जिंदा हैं लेकिन दबाव और मानसिक प्रताड़ना चरम पर है।” उन्होंने बताया कि जेल में हालात बेहद खराब हैं, और खान हर पल यह महसूस कर रहे हैं कि वे चौतरफा घिरे हुए हैं। उनके शब्दों ने न सिर्फ उनके समर्थकों बल्कि तटस्थ पर्यवेक्षकों को भी झकझोर दिया है, क्योंकि किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री का इस स्थिति तक पहुँच जाना पाकिस्तान के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जेल प्रशासन और सरकार इस तरह के आरोपों को हमेशा की तरह “निराधार” और “राजनीतिक ड्रामा” बताते हैं, लेकिन खान की बहन के इस दावे ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। खास बात यह है कि पाकिस्तान में पहले भी कई बड़े नेताओं बेनज़ीर भुट्टो से लेकर ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो तक सत्ता और सुरक्षा की इस खतरनाक जंग के शिकार रहे हैं। इसलिए इमरान खान का यह बयान अचानक से आया हुआ दावा नहीं, बल्कि पाकिस्तान की लंबी राजनीतिक परंपरा का हिस्सा जैसा दिखाई देता है।

दूसरी ओर इमरान खान के समर्थक इस खुलासे को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि अगर पाकिस्तान एक और राजनीतिक हत्या का गवाह बना तो इसका असर केवल देश पर नहीं, पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। पीटीआई नेता भी लगातार यह कह रहे हैं कि इमरान खान को जानबूझकर ऐसे माहौल में रखा जा रहा है जहाँ किसी भी “दुर्घटना” को आसानी से घटना दिखाया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए है। अमेरिका से लेकर यूरोपीय देश तक पहले ही पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठा चुके हैं। अब जब इमरान खान की बहन खुद कह रही हैं कि “उनकी जिंदगी खतरे में है”, तो दुनिया के बड़े मीडिया संगठन और मानवाधिकार एजेंसियाँ इस पर ज़ोरदार प्रतिक्रिया दे सकती हैं।

इस पूरी स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान सिर्फ आर्थिक संकट या राजनीतिक अस्थिरता से नहीं जूझ रहा वह एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है जहाँ सत्ता की लड़ाई अब खुली ताक़त और डर की राजनीति में बदल रही है। और इस खेल का सबसे बड़ा दाँव लगा है इमरान खान की जिंदगी पर।

अब नजरें सिर्फ एक सवाल पर अटकी हैं क्या इमरान खान खुद को इस राजनीतिक तूफान से बचा पाएंगे, या पाकिस्तान की सियासत एक बार फिर अपने ही नेता को निगल लेगी?

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