किसी भी ऑफिस, सड़क या भीड़भाड़ वाली जगह पर अचानक कोई इंसान गिर पड़े और आपको शक हो कि उसे हार्ट अटैक आया है तो उस वक्त आपकी समझदारी उस व्यक्ति की सांसों और धड़कनों के बीच खड़ी सबसे बड़ी उम्मीद बन सकती है। दिल रुकते ही शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बंद होने लगता है और हर सेकंड की देरी दिमाग व दिल को नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में प्रोफेशनल मदद पहुँचने तक CPR ही वह कदम है जो किसी को मौत के मुहाने से वापस ला सकता है। सबसे पहला काम घबराएं नहीं और तुरंत एम्बुलेंस नंबर 102 या 108 पर कॉल करें, क्योंकि मेडिकल टीम जितनी जल्दी पहुंचेगी, बचने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी।
अगर कॉल करते वक्त आपको लगे कि व्यक्ति सांस नहीं ले रहा या उसकी छाती उठ-गिर नहीं रही, तो समय न गंवाते हुए उसे ज़मीन पर सीधा लिटाएं और CPR शुरू कर दें। CPR में सबसे जरूरी होता है छाती के बीचों-बीच सही जगह पर दबाव देना। अपनी दोनों हथेलियों को एक-दूसरे पर रखकर, हथेली की एड़ी वाला हिस्सा मरीज की छाती के बीच में रखें और लगभग 2 इंच नीचे की ओर ज़ोर से दबाएँ, फिर छोड़ दें। यह प्रक्रिया लगातार, तेज़ और लयबद्ध होनी चाहिए लगभग 100–120 प्रेशर प्रति मिनट की गति से, जैसे किसी तेज़ गाने की बीट पर।
अगर आपको रेस्क्यू ब्रीथिंग आती है तो हर 30 दबावों के बाद दो सांसें देना बेहद असरदार होता है, लेकिन अगर आप सांसें देने में सहज नहीं हैं या तरीका नहीं जानते तो सिर्फ छाती का दबाव ही पर्याप्त है। किसी विशेषज्ञ के आने तक इस प्रेशर को रुकने न दें, क्योंकि CPR के दौरान दिल और दिमाग तक थोड़ी-बहुत ऑक्सीजन पहुंचती रहती है और यही किसी की जान बचाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
कई जगहों पर AED मशीनें भी मिल जाती हैं ये वो डिवाइस होती हैं जो दिल की रिदम चेक कर शॉक दे सकती हैं। अगर AED उपलब्ध हो, तो तुरंत उसे ऑन करें और उसके बताए ऑडियो निर्देशों का पालन करें। यह मशीन खुद बताती है कि शॉक कब देना है और CPR कब जारी रखना है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं होती।
अक्सर ऐसे वक्त पर लोग डर जाते हैं, हाथ कांपने लगते हैं या उन्हें लगता है कि कहीं गलत न कर दें लेकिन सच ये है कि CPR देने की कोशिश करना, बिल्कुल कोशिश न करने से लाख गुना बेहतर है। शुरू के कुछ मिनटों में लिया गया फैसला किसी की जिंदगी, उसके परिवार और पूरी दुनिया के लिए चमत्कार बन सकता है।
ऐसी स्थिति में आपका शांत रहना, तुरंत कदम उठाना और CPR जारी रखना ही वह जीवनरेखा है जो किसी की धड़कन को वापस जगा सकती है। ये मेडिकल प्रोफेशनल बनने का मामला नहीं यह इंसानियत का फर्ज है, जिसे निभाने के लिए सिर्फ हिम्मत और तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है।
हर जगह, हर दिन, हर माहौल में यह ज्ञान काम आ सकता है क्योंकि हार्ट अटैक उम्र, जगह और समय देखकर नहीं आता। बस याद रखें: फोन कॉल, सही CPR और आपकी सूझबूझ… ये तीन चीजें किसी की ज़िंदगी को मौत से वापस खींच सकती हैं।
इसलिए अगली बार अगर किसी के सामने ऐसा पल आए, तो घबराएं नहीं आपकी कोशिश शायद उसकी धड़कन को फिर से चलने का दूसरा मौका दे दे।
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