टीम इंडिया के हालिया टेस्ट प्रदर्शन ने क्रिकेट जगत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के बाद अब टीम के हेड कोच गौतम गंभीर भी आलोचनाओं के घेरे में आ गए हैं। टेस्ट क्रिकेट जैसे सबसे चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में टीम की रणनीति, चयन और तैयारी को लेकर उठ रही आवाज़ों ने माहौल गरमा दिया है। इसी बीच इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
पनेसर का मानना है कि अगर गौतम गंभीर को रेड-बॉल क्रिकेट में खुद को एक सफल कोच के रूप में साबित करना है, तो उन्हें पहले घरेलू क्रिकेट की जमीनी हकीकत को समझना होगा। उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ इंटरनेशनल अनुभव के दम पर टेस्ट टीम को संभालना आसान नहीं होता। रणजी ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट भारतीय क्रिकेट की असली प्रयोगशाला हैं, जहां खिलाड़ी और कोच दोनों सीखते हैं कि लंबे फॉर्मेट की असली चुनौतियां क्या होती हैं।
पूर्व इंग्लिश स्पिनर के मुताबिक, रणजी टीम के साथ काम करने से कोच को युवा खिलाड़ियों की मानसिकता, तकनीकी कमियों और दबाव से निपटने के तरीकों को करीब से समझने का मौका मिलता है। पनेसर का मानना है कि यही अनुभव आगे चलकर टेस्ट टीम को मजबूत बनाने में सबसे ज्यादा मदद करता है। उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि सिर्फ नाम और अनुभव काफी नहीं, बल्कि सिस्टम को नीचे से समझना जरूरी है।
इस बयान के बाद भारतीय क्रिकेट गलियारों में हलचल तेज हो गई। कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ इस राय से सहमत नजर आए कि टेस्ट क्रिकेट में सफलता के लिए गहरी रणनीति और घरेलू ढांचे की मजबूत समझ जरूरी होती है। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि गंभीर जैसे अनुभवी खिलाड़ी को अपनी शैली साबित करने के लिए समय दिया जाना चाहिए।
इसी बीच मीडिया में यह खबर भी उड़ी कि बीसीसीआई ने पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ वीवीएस लक्ष्मण से रेड-बॉल टीम के कोच पद को लेकर बातचीत की है। हालांकि बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कहा कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है और फिलहाल कोचिंग स्टाफ में किसी बदलाव की योजना नहीं है।
इन तमाम चर्चाओं के बीच सवाल यही उठ रहा है कि क्या गौतम गंभीर इस चुनौती को स्वीकार कर खुद को एक मजबूत टेस्ट कोच के रूप में स्थापित कर पाएंगे, या फिर आलोचकों की आवाज़ और तेज़ होती जाएगी। टेस्ट क्रिकेट की असली परीक्षा धैर्य, रणनीति और निरंतरता की होती है, और यही कसौटी अब गंभीर के सामने है।
गंभीर अपने बेबाक अंदाज़ और कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कोच के तौर पर यह दौर उनके करियर का सबसे अहम मोड़ साबित हो सकता है। अगर वह टीम को सही दिशा में ले जाते हैं, तो सारी आलोचनाएं खुद-ब-खुद शांत हो जाएंगी।
फिलहाल इतना तय है कि भारतीय टेस्ट टीम और उसके कोच पर सबकी नजरें टिकी हैं। आने वाले मैच सिर्फ खिलाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि गौतम गंभीर के कोचिंग सफर के लिए भी एक बड़ा इम्तिहान साबित होने वाले हैं।
written by :- Anjali Mishra
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
