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UP में PWD विभाग की बड़ी लापरवाही: 6500 करोड़ का बजट किया सरेंडर!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़कों को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने और गांव-गांव सड़क पहुंचाने के लिए सरकार हर साल PWD विभाग को हजारों करोड़ का बजट देती है। बावजूद इसके, विभाग समय पर बजट खर्च नहीं कर पाता, जिससे विकास कार्यों में देरी होती है। ऐसा ही मामला बीते वित्तीय वर्ष में सामने आया, जब PWD ने 6500 करोड़ रुपये का बजट खर्च ही नहीं किया और उसे सरेंडर कर दिया।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़कों को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने और गांव-गांव सड़क पहुंचाने के लिए सरकार हर साल PWD विभाग को हजारों करोड़ का बजट देती है। बावजूद इसके, विभाग समय पर बजट खर्च नहीं कर पाता, जिससे विकास कार्यों में देरी होती है। ऐसा ही मामला बीते वित्तीय वर्ष में सामने आया, जब PWD ने 6500 करोड़ रुपये का बजट खर्च ही नहीं किया और उसे सरेंडर कर दिया।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में लापरवाही की हद

2023-24 में PWD को कुल 30,500 करोड़ रुपये का बजट मिला था।

इसमें से 6,500 करोड़ रुपये खर्च ही नहीं हो सके और सरेंडर कर दिए गए।

PWD ने पिछले साल की तुलना में 3% कम बजट खर्च किया।

कार्ययोजना में देरी के कारण कई अहम प्रोजेक्ट अटके रहे।

वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने मार्च में ही 3,950 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गईं, जिससे स्पष्ट होता है कि विभाग ने पूरे साल सुस्ती दिखाई और आखिरी समय में जल्दबाजी की।

बजट सरेंडर करने की पुरानी आदत!

वित्तीय वर्ष 2023-24 में 19% बजट सरेंडर किया गया।

2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 22% तक पहुंच गया।

बार-बार बजट सरेंडर होने से प्रदेश के सड़क विकास कार्यों पर बुरा असर पड़ता है।

PWD की सुस्ती से विकास कार्य ठप

PWD की लापरवाही से प्रदेश में कई सड़क और पुल निर्माण परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। समय पर बजट खर्च न कर पाने से सरकार की विकास योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं। सवाल यह उठता है कि जब सरकार समय पर फंड उपलब्ध करा रही है, तो फिर PWD समय पर काम क्यों नहीं कर रहा?

आखिर कब सुधरेगा PWD?

PWD के इस रवैये से सरकार की साख पर भी असर पड़ता है। सरकार को चाहिए कि वह PWD अधिकारियों की जवाबदेही तय करे और सुस्त अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में बजट सरेंडर होने की नौबत न आए और प्रदेश की सड़कों का विकास रफ्तार पकड़ सके।

PWD प्रमुख सचिव अजय चौहान ने बताया कि

“कई लोगों ने अनुमान लगाया था कि बजट सरेंडर की राशि 8000 से 12000 करोड़ रुपये तक होगी, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे कम है। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो हमने पिछले वर्ष की तुलना में अधिक बजट जारी किया है और खर्च भी लगभग समान ही रहा है।मुझे लगता है कि पिछले साल हमने 81% बजट खर्च किया था, जबकि इस साल यह 80% रहेगा। हालांकि, मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि मेरी पूरी टीम, HOD से लेकर जूनियर इंजीनियर (जेई) तक, सभी ने कड़ी मेहनत की और इसे हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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