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बजट पास, सड़क फेल: सिस्टम की सुस्ती या साजिश?”

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में सड़कों का सुदृढ़ नेटवर्क प्रमुख है। उद्देश्य है – गांवों को शहरों से जोड़कर जनता को एक सुगम और श्रमशील जीवन देना। इसी कड़ी में सीएम खुद समय-समय पर विभागीय कामकाज की समीक्षा करते हैं। पहले ये जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के पास थी, लेकिन अब खुद सीएम के पास विभाग की कमान है। मुख्यमंत्री की सक्रियता के बावजूद पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली में कोई खास सुधार नजर नहीं आता। वर्षों से विभाग विवादों में रहा है, और अब एक और बड़ा सवाल – आखिर विभाग लगातार बजट का इतना बड़ा हिस्सा सरेंडर क्यों कर रहा है?

मुख्यमंत्री की मंशा साफ, लेकिन सिस्टम में सरेंडर है साफ!
उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में सड़कों का सुदृढ़ नेटवर्क प्रमुख है। उद्देश्य है – गांवों को शहरों से जोड़कर जनता को एक सुगम और श्रमशील जीवन देना। इसी कड़ी में सीएम खुद समय-समय पर विभागीय कामकाज की समीक्षा करते हैं। पहले ये जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के पास थी, लेकिन अब खुद सीएम के पास विभाग की कमान है।

आदेश जारी, काम नदारद
मुख्यमंत्री की सक्रियता के बावजूद पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली में कोई खास सुधार नजर नहीं आता। वर्षों से विभाग विवादों में रहा है, और अब एक और बड़ा सवाल – आखिर विभाग लगातार बजट का इतना बड़ा हिस्सा सरेंडर क्यों कर रहा है?


बजट की कहानी: करोड़ों की ‘सरेंडर संस्कृति’

2021-22:
बजट: ₹23,562 करोड़
सरेंडर राशि: ₹6,982.36 करोड़

2022-23:
बजट: ₹27,140 करोड़
सरेंडर राशि: ₹8,914 करोड़ (करीब 33%)

2023-24:
बजट: ₹30,500 करोड़
सरेंडर राशि: ₹6,500 करोड़
विभागीय सूत्रों के अनुसार, असल में करीब ₹12,000 करोड़ की राशि सरेंडर हुई।

2024-25 (अब तक):
अनुमानित सरेंडर: 22% बजट
केवल मार्च महीने में ही ₹3,950 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई, लेकिन उपयोग नहीं हुआ।


विधायकों की नाराज़गी, अधिकारियों की चुप्पी
सरकार के ही कई विधायक बताते हैं कि उन्होंने दर्जनों पत्र दिए, लेकिन उनके क्षेत्रों की सड़कों के लिए बजट आवंटन नहीं हुआ। वहीं विभाग ने बिना काम किए अरबों रुपये वापस कर दिए। नाम न छापने की शर्त पर कुछ विधायकों ने विभाग की उदासीनता पर सवाल उठाए।


जमीनी हकीकत और फाइलों का फर्क
सूत्रों का दावा है कि अब तक का आंकड़ा अधूरा है। सभी खंडों से डाटा नहीं मिला है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक, सरेंडर की असल राशि ₹13,000 करोड़ तक हो सकती है।


निष्कर्ष: बजट है, सपने हैं… पर काम किधर है?
सीएम योगी आदित्यनाथ जनता को बेहतर सड़क सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली और बजट के उपयोग में कोताही उनके सपनों पर पानी फेर रही है। जब बजट भी है, अधिकार भी हैं, तो फिर परिणाम क्यों नहीं हैं |

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