दुनिया की अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा खतरा मंडराता दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच कई देशों ने आशंका जताई है कि यदि यह संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो दुनिया गंभीर आर्थिक उथल-पुथल का सामना कर सकती है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
Lawrence Wong ने इस मुद्दे पर चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो दुनिया 1970 के दशक जैसे तेल संकट और आर्थिक मंदी जैसी स्थिति देख सकती है। उनके अनुसार यह सिर्फ तेल आपूर्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़ा बड़ा आर्थिक जोखिम बन चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचता है। अगर यहां सप्लाई प्रभावित होती है, तो उसका असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य पदार्थों, उर्वरकों और अन्य आवश्यक सामानों की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि एशियाई देशों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ सकता है, क्योंकि कई देशों की ऊर्जा जरूरतें खाड़ी क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर हैं। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई और तेज हो सकती है। इसके अलावा सप्लाई चेन में देरी और परिवहन लागत बढ़ने से बाजारों में अस्थिरता पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है।
इस बीच भारत में भी आर्थिक गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा ईंधन बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग की अपील के बाद बाजार में असर देखने की बातें सामने आ रही हैं। ऊर्जा बचत को लेकर सरकार और विभिन्न राज्यों की ओर से भी कई स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं।
इसी क्रम में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद बाजार में इनकी कीमतों में तेजी देखी जा रही है। महंगी आयात लागत का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब शादी और त्योहारों का सीजन भी कई परिवारों के लिए खर्च बढ़ाता है।
साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है और इसका असर धीरे-धीरे रोजमर्रा के सामानों की कीमतों तक पहुंच जाता है। यही कारण है कि आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल वैश्विक बाजारों की नजर होर्मुज क्षेत्र के हालात पर टिकी हुई है। अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती, तो आने वाले समय में दुनिया को ऊर्जा संकट, बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि ऐसे विषयों पर वास्तविक स्थिति और सरकारी निर्णयों को आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर समझना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
written by:- Anjali Mishra
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