कर्नाटक में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा कर दिया गया है, जिससे राज्य की राजनीतिक दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
DK Shivakumar ने मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद प्रमुख मंत्रालयों का वितरण करते हुए कुछ अहम विभाग अपने पास रखे हैं। उन्होंने वित्त, कैबिनेट मामले और इंटेलिजेंस जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी अपने पास रखी है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार के रणनीतिक फैसलों पर उनका सीधा नियंत्रण रहेगा।
मंत्रिमंडल में अन्य नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। Priyank Kharge को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे राज्य के कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
वहीं उपमुख्यमंत्री डॉ. जी परमेश्वर को राजस्व विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जो प्रशासनिक कामकाज और भूमि संबंधी नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे को शहरी विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जो शहरों के विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और आवास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस विभागीय बंटवारे को सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। विभिन्न गुटों और नेताओं को शामिल करके सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सत्ता में सभी प्रमुख वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कैबिनेट फॉर्मेशन में अनुभव और नई पीढ़ी दोनों का मिश्रण दिखता है, जिससे सरकार विकास और स्थिरता दोनों पर फोकस करना चाहती है।
फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विभागीय ढांचा जमीन पर कितनी तेजी से काम करता है और क्या यह राज्य की प्रशासनिक गति को नई दिशा दे पाता है या नहीं।
written by:- Anjali Mishra
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