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राम मंदिर आंदोलन के योद्धा का दर्द! विनय कटियार बोले- ‘जिस मंदिर के लिए लाठियां खाईं, वहीं मुझसे मांगा गया पास|

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा विवाद और ट्रस्ट को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे विनय कटियार ने दावा किया है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनने के बाद वह केवल एक बार मंदिर गए थे, लेकिन वहां उनसे प्रवेश के लिए “पास” मांगा गया। कटियार का कहना है कि इस घटना ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया और इसके बाद उन्होंने मंदिर जाना ही बंद कर दिया।

विनय कटियार उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान अग्रिम पंक्ति में रहकर सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया, आंदोलन किए, जेल गए और सड़कों पर लाठियां तक खाईं। ऐसे में जब मंदिर निर्माण का सपना पूरा हुआ तो उन्हें उम्मीद थी कि यह उनके जीवन के सबसे संतोषजनक क्षणों में से एक होगा, लेकिन मंदिर परिसर में हुए कथित व्यवहार ने उन्हें निराश कर दिया।

कटियार का दर्द सिर्फ एक व्यक्ति की नाराजगी नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की भावना के रूप में भी देखा जा रहा है जिसने राम मंदिर आंदोलन को जनांदोलन बनाने में भूमिका निभाई थी। उनका कहना है कि जिस उद्देश्य के लिए उन्होंने अपना राजनीतिक और सामाजिक जीवन समर्पित किया, उसी मंदिर में उनसे पहचान और प्रवेश के लिए पास मांगा जाना बेहद पीड़ादायक अनुभव था।

इसी बीच राम मंदिर के चढ़ावे और दानपात्रों को लेकर सामने आए विवादों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। कटियार ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि मंदिर की व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि मंदिर में बैठे “चोरों” को बख्शा नहीं जाना चाहिए और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि चढ़ावा विवाद और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। ऐसे में सभी दावों को जांच पूरी होने तक आरोप और बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

राम मंदिर आंदोलन भारतीय राजनीति और सामाजिक इतिहास का एक बड़ा अध्याय रहा है। इस आंदोलन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वर्षों तक इसके लिए अभियान चलाया था। ऐसे में जब आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक विनय कटियार सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं, तो यह स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है।

कटियार के बयान ने मंदिर प्रबंधन, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और आंदोलन से जुड़े पुराने नेताओं की भूमिका को लेकर भी बहस छेड़ दी है। कई लोग इसे व्यक्तिगत अनुभव मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे मंदिर से जुड़े व्यापक विवादों और असंतोष के संदर्भ में देख रहे हैं।

फिलहाल अयोध्या में राम मंदिर को लेकर दो समानांतर चर्चाएं चल रही हैं एक तरफ चढ़ावा और कथित अनियमितताओं की जांच, दूसरी तरफ आंदोलन के पुराने नेताओं की भावनाएं और शिकायतें। विनय कटियार का यह बयान इन्हीं दोनों मुद्दों को जोड़ता हुआ नजर आता है। अब देखना होगा कि मंदिर ट्रस्ट, जांच एजेंसियां और संबंधित पक्ष इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

written by :- Anjali Mishra

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