अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए दावे और सवाल सामने आ रहे हैं। मामले में अब रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के बयान ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। टिन्नू यादव ने दावा किया है कि मंदिर के कैश की जिम्मेदारी उनकी नहीं बल्कि ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा की थी। उन्होंने जांच टीम से अनिल मिश्रा की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
टिन्नू यादव के इस बयान के बाद जांच का फोकस अब सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ट्रस्ट की व्यवस्था और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर भी सवाल उठने लगे हैं। उनका दावा है कि जिस रकम को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसकी निगरानी और जिम्मेदारी किसके पास थी, इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। इसी बीच डॉ. अनिल मिश्रा के अयोध्या से बाहर होने की चर्चा भी सामने आई है, जिससे मामले को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
इस पूरे मामले की जांच कर रही SIT अब कई स्तरों पर पड़ताल कर रही है। टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय और गोपाल राव से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान कई दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए हैं, जिनमें चढ़ावे की गिनती, सुरक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड से जुड़े कागजात शामिल बताए जा रहे हैं।
SIT अब तक करीब 40 कर्मचारियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दानपात्र से आने वाली रकम की पूरी प्रक्रिया क्या थी, रकम की गिनती कैसे होती थी, रिकॉर्ड किस तरह रखा जाता था और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई कमी तो नहीं रही। कर्मचारियों के बयानों को आपस में मिलाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
इसी बीच राम मंदिर आंदोलन के समय आईं कथित बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं को लेकर भी एक नया दावा सामने आया है। बताया जा रहा है कि आंदोलन के दौरान देश-विदेश से करीब 1250 श्रीराम शिलाएं लाई गई थीं, जिनमें कुछ शिलाओं में सोना, चांदी और रत्न जड़े होने की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इसने एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
चर्चा है कि इन शिलाओं में सबसे खास एक शिला मॉरीशस से आई थी, जबकि मुंबई के एक हीरा व्यापारी द्वारा हीरों से जड़ी शिला दान किए जाने का भी दावा किया जा रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि जब SIT चढ़ावा और वित्तीय व्यवस्था की जांच कर रही है, तो क्या इन कथित बहुमूल्य शिलाओं और उनकी मौजूदा स्थिति की भी पड़ताल की जाएगी?
मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि यदि मंदिर में आने वाले दान, चढ़ावे और बहुमूल्य वस्तुओं का रिकॉर्ड मौजूद है तो फिर विवाद की स्थिति कैसे बनी। जांच एजेंसियां अब रिकॉर्ड, कर्मचारियों के बयान और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को जोड़कर पूरे मामले की तस्वीर साफ करने में जुटी हैं।
हालांकि इस पूरे प्रकरण में यह जरूरी है कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी न माना जाए। सामने आ रहे सभी दावे फिलहाल आरोप और बयान के स्तर पर हैं। असली सच्चाई SIT की जांच और उसके निष्कर्षों के बाद ही सामने आएगी।
अब देशभर की नजर इस बात पर है कि SIT की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या आने वाले दिनों में चढ़ावा विवाद, कथित शिलाओं और ट्रस्ट की भूमिका से जुड़े सवालों के जवाब मिल पाते हैं या नहीं। अयोध्या से जुड़ा यह मामला सिर्फ आर्थिक जांच नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।
written by :- Anjali Mishra
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
