अयोध्या के राम मंदिर में दानराशि और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच अब मामला केवल कथित गड़बड़ियों की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इसी बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष Nripendra Misra ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है।
नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि मंदिर जैसी विशाल और राष्ट्रीय महत्व की संस्था के संचालन के लिए एक अनुभवी CEO या विशेष कार्याधिकारी की नियुक्ति पर विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बढ़ते संचालन, श्रद्धालुओं की संख्या और वित्तीय गतिविधियों को देखते हुए पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भूमि खरीद विवाद के समय भी पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग उठी थी, इसलिए वर्तमान विवाद को एक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।
दानराशि विवाद के बीच अब ट्रस्ट के वित्तीय खर्चों को लेकर भी नए सवाल सामने आ रहे हैं। आरोपों के अनुसार ट्रस्ट के कुछ दस्तावेजों में लगभग 11 महीनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने का उल्लेख है। इसी आंकड़े को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और कई लोग जानना चाहते हैं कि यह राशि किन व्यवस्थाओं पर खर्च की गई।
आलोचकों का तर्क है कि मंदिर परिसर पहले से ही बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में है। यहां सरकारी सुरक्षा बलों की तैनाती, व्यापक CCTV निगरानी और अन्य सुरक्षा प्रबंध मौजूद हैं। ऐसे में सुरक्षा मद में दिखाए गए खर्च को लेकर पारदर्शिता की मांग उठ रही है। हालांकि इन खर्चों के वास्तविक स्वरूप और विवरण को लेकर अभी आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
सिर्फ सुरक्षा खर्च ही नहीं, बल्कि भोग-प्रसाद, रखरखाव, प्रशासनिक मदों और विभिन्न टेंडर प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इसकी नियमित और विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि किसी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे।
इसी बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath शुक्रवार को अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। लेकिन इस दौरान मंदिर ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।
जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन की ओर से जारी एक पत्र में चंपत राय से कहा गया है कि मुख्यमंत्री के मंदिर दर्शन और पूजन कार्यक्रम के लिए वे किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नियुक्त करें। साथ ही नियुक्त प्रतिनिधि की जानकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस निर्णय ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इसे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं से जुड़ा निर्णय बताया जा सकता है, लेकिन चढ़ावा विवाद के बीच इसके सामने आने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दल और आलोचक इसे मौजूदा विवाद से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि ट्रस्ट समर्थकों का कहना है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जाना चाहिए।
फिलहाल राम मंदिर से जुड़ा यह मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। एक तरफ SIT जांच आगे बढ़ रही है, दूसरी तरफ प्रबंधन संरचना, वित्तीय पारदर्शिता और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां क्या निष्कर्ष निकालती हैं, प्रशासनिक स्तर पर क्या बदलाव होते हैं और क्या मंदिर प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्थाएं लागू की जाती हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मुद्दे में पारदर्शिता और भरोसा ही सबसे बड़ी कसौटी बने हुए हैं।
written by:- Anjali Mishra
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