उत्तर प्रदेश का नाम आते ही अक्सर लोगों के मन में ऐतिहासिक शहर, धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक विरासत की तस्वीर उभरती है। लेकिन इसी प्रदेश में एक ऐसा प्राकृतिक खजाना भी मौजूद है, जिसने भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हम बात कर रहे हैं पीलीभीत टाइगर रिजर्व की, जहां घने जंगलों के बीच बाघों की दहाड़ सिर्फ रोमांच ही नहीं, बल्कि सफल वन संरक्षण की कहानी भी सुनाती है। पिछले कुछ वर्षों में यहां बाघों की संख्या में बढ़ोतरी और जैव विविधता के संरक्षण ने इसे देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल कर दिया है। लेकिन इस सफलता के पीछे केवल वन विभाग नहीं, बल्कि गांवों से जुड़े कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्हें आज ‘बाघ मित्र’ के नाम से जाना जाता है।
साल 2019-20 में शुरू की गई ‘बाघ मित्र’ पहल आज पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सबसे महत्वपूर्ण संरक्षण योजनाओं में गिनी जाती है। इस पहल का उद्देश्य जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण का सक्रिय भागीदार बनाना था। वन विभाग ने जंगल से सटे गांवों के चुनिंदा लोगों को विशेष प्रशिक्षण दिया, ताकि वे बाघों की गतिविधियों को समझ सकें और समय रहते आवश्यक जानकारी अधिकारियों तक पहुंचा सकें। इस पहल ने जंगल और गांव के बीच भरोसे का ऐसा पुल बनाया है, जिसका लाभ आज इंसानों और वन्यजीवों दोनों को मिल रहा है।
बाघ मित्रों को केवल सामान्य जानकारी नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें जंगल में बाघ की मौजूदगी के संकेत पहचानने की विशेष ट्रेनिंग भी दी जाती है। वे बाघ के पंजों के निशान, शिकार के अवशेष, आवाज, मूवमेंट और अन्य प्राकृतिक संकेतों के आधार पर यह समझ लेते हैं कि किसी इलाके में बाघ सक्रिय है या नहीं। यही जानकारी वन विभाग के लिए बेहद उपयोगी साबित होती है, क्योंकि कई बार शुरुआती सूचना ही किसी बड़ी घटना को टालने में मदद करती है।
जब कभी कोई बाघ जंगल से निकलकर आबादी की ओर बढ़ता है, तब सबसे पहले यही बाघ मित्र सक्रिय हो जाते हैं। वे गांव के लोगों को सतर्क करते हैं, अनावश्यक भीड़ को मौके से दूर रखते हैं और लोगों से शांत रहने की अपील करते हैं। साथ ही वे वन विभाग की टीम को सही स्थान और स्थिति की जानकारी देकर रेस्क्यू ऑपरेशन को आसान बनाते हैं। उनका उद्देश्य केवल बाघ को सुरक्षित जंगल तक पहुंचाना नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी होता है कि किसी इंसान या वन्यजीव को नुकसान न पहुंचे। यही कारण है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षण तभी सफल हो सकता है जब स्थानीय समुदाय उसकी जिम्मेदारी अपने स्तर पर भी निभाए। पीलीभीत में बाघ मित्र मॉडल इसी सोच का उदाहरण बन चुका है। इससे गांवों में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ी है और लोगों का नजरिया भी बदला है। जहां पहले बाघ के गांव में आने पर दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन जाता था, वहीं अब प्रशिक्षित स्थानीय लोग हालात को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी हद तक कम हुई है।
अगर बात करें पीलीभीत टाइगर रिजर्व की, तो यह केवल बाघों का घर नहीं बल्कि जैव विविधता का एक समृद्ध केंद्र भी है। तराई क्षेत्र के घने जंगलों, घास के मैदानों और नदियों से घिरा यह रिजर्व तेंदुए, हाथी, हिरण, सांभर, बारहसिंगा और सैकड़ों दुर्लभ पक्षियों का भी सुरक्षित आवास है। प्रकृति की विविधता और शांत वातावरण इसे वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं बनाते। यही वजह है कि हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक यहां सफारी का रोमांच लेने पहुंचते हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी यहां लगातार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मुस्तफाबाद जैसे सफारी केंद्रों पर आधुनिक पर्यटक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे जंगल सफारी का अनुभव पहले से कहीं अधिक आरामदायक और रोमांचक हो गया है। प्रशिक्षित गाइड, बेहतर सफारी व्यवस्था और प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों को जंगल के बेहद करीब ले जाते हैं। यहां आने वाले पर्यटक केवल बाघ देखने ही नहीं, बल्कि प्रकृति को उसके वास्तविक स्वरूप में महसूस करने भी आते हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सबसे बड़ी सफलता केवल बाघों की बढ़ती संख्या नहीं है, बल्कि वह संतुलन है जो इंसानों और वन्यजीवों के बीच बनाया गया है। ‘बाघ मित्र’ जैसी पहल ने यह साबित किया है कि संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से भी मजबूत होता है। जब गांव के लोग खुद जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने लगते हैं, तब संरक्षण का मॉडल कहीं अधिक प्रभावी बन जाता है।
अगर आपने अब तक पीलीभीत टाइगर रिजर्व की यात्रा नहीं की है, तो शायद आपने उत्तर प्रदेश के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक खजानों में से एक को अभी तक नहीं देखा। यहां की हरियाली, बाघों की मौजूदगी, दुर्लभ वन्यजीव, पक्षियों की चहचहाहट और जंगल के बीच रोमांच से भरी सफारी हर प्रकृति प्रेमी के लिए यादगार अनुभव बन सकती है। और जब आप इस जंगल की कहानी जानेंगे, तो समझ आएगा कि इसकी असली ताकत केवल बाघ नहीं, बल्कि वे ‘बाघ मित्र’ भी हैं, जो हर दिन चुपचाप जंगल, वन्यजीव और इंसानों—तीनों की सुरक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
written by:- Anjali Mishra
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