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मनरेगा की जगह लागू हुआ नया कानून! अब 125 दिन रोजगार की गारंटी, 1 जुलाई से ग्रामीण भारत में क्या-क्या बदल गया?

देशभर में 1 जुलाई 2026 से ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAM G) को पूरे देश में लागू कर दिया है। इसके साथ ही लगभग दो दशक तक लागू रहे मनरेगा (MGNREGA) की जगह अब नई कानूनी व्यवस्था प्रभावी हो गई है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास, टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी के माध्यम से गांवों के समग्र विकास को गति देने की दिशा में उठाया गया कदम है।

नई व्यवस्था के तहत सबसे बड़ा बदलाव रोजगार की अवधि में हुआ है। पहले मनरेगा के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती थी, जबकि अब यह बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त रोजगार और आय का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित होंगे।

सरकार ने इस नए कानून में केवल रोजगार बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों (Durable Assets) के निर्माण पर भी विशेष जोर दिया है। नई व्यवस्था के तहत सड़क, जल संरक्षण, सिंचाई, सामुदायिक ढांचे और अन्य दीर्घकालिक विकास कार्यों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है। उद्देश्य यह है कि रोजगार के साथ-साथ गांवों में ऐसी स्थायी सुविधाएं भी विकसित हों, जिनका लाभ लंबे समय तक स्थानीय लोगों को मिलता रहे।

इस कानून में ग्राम पंचायतों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास योजनाओं को तैयार करने और उन्हें लागू करने में पंचायतों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार का कहना है कि स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण से विकास कार्य अधिक प्रभावी होंगे और गांवों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप परियोजनाओं का चयन किया जा सकेगा।

नई व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता तकनीक आधारित निगरानी भी है। सरकार ने डिजिटल मॉनिटरिंग, सोशल ऑडिट, ऑनलाइन रिकॉर्ड और पारदर्शी कार्यप्रणाली को अधिक मजबूत बनाने की बात कही है। इसके माध्यम से रोजगार कार्यों, भुगतान प्रक्रिया और परियोजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। सरकार का दावा है कि इससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी और जवाबदेही बढ़ेगी।

केंद्र सरकार इस कानून को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार बता रही है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था रोजगार, आजीविका, कौशल, बुनियादी ढांचे और स्थानीय विकास को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाएगी, जिससे गांवों में स्थायी आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

हालांकि, इस कानून को लेकर राजनीतिक और नीतिगत बहस भी जारी है। कुछ राजनीतिक दलों, श्रमिक संगठनों और नीति विशेषज्ञों ने नई व्यवस्था के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार इसे ग्रामीण विकास की दिशा में आवश्यक सुधार बता रही है। इस विषय पर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग राय सामने आ रही है और सार्वजनिक विमर्श जारी है।

फिलहाल 1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था पूरे देश में लागू हो चुकी है। अब ग्रामीण रोजगार का संचालन VB-G RAM G अधिनियम, 2025 के तहत होगा। आने वाले समय में इसका वास्तविक प्रभाव रोजगार उपलब्धता, ग्रामीण आय, विकास परियोजनाओं और गांवों की अर्थव्यवस्था पर किस रूप में दिखाई देता है, इसका आकलन इसके क्रियान्वयन और जमीनी परिणामों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

written by :- Anjali Mishra

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