back to top
Tuesday, September 1, 2026
27 C
Lucknow
HomeUncategorizedएनर्जी ड्रिंक' पर FSSAI की बड़ी कार्रवाई! क्या अब बदलेंगे Sting, Red...

एनर्जी ड्रिंक’ पर FSSAI की बड़ी कार्रवाई! क्या अब बदलेंगे Sting, Red Bull और Campa के दावे ?

बाजार में “एनर्जी बढ़ाने” और “फोकस बेहतर करने” जैसे दावों के साथ बिकने वाले कई लोकप्रिय पेय पदार्थ अब नियामकीय जांच के दायरे में आ गए हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्टिंग, रेड बुल, कैंपा समेत कई ब्रांडों को नोटिस जारी किया है। इस कार्रवाई ने न केवल इन उत्पादों की मार्केटिंग रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उपभोक्ताओं के सामने भी यह चर्चा शुरू कर दी है कि आखिर “एनर्जी ड्रिंक” कहे जाने वाले इन उत्पादों के दावों की वैधता क्या है।

FSSAI के अनुसार, भारत में फिलहाल “Energy Drink” के लिए कोई अलग और आधिकारिक खाद्य मानक निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में किसी उत्पाद को “एनर्जी ड्रिंक” के रूप में प्रस्तुत करना या उससे जुड़े विशेष स्वास्थ्य संबंधी दावे करना नियामकीय दृष्टि से जांच का विषय बन सकता है। प्राधिकरण का मानना है कि जब तक किसी श्रेणी के लिए स्पष्ट मानक तय नहीं होते, तब तक उससे जुड़े प्रचार-प्रसार और लेबलिंग भी निर्धारित नियमों के अनुरूप होने चाहिए।

बताया जा रहा है कि FSSAI ने विशेष रूप से उन दावों पर आपत्ति जताई है, जिनमें उत्पादों को “एनर्जी बढ़ाने वाला”, “फोकस बढ़ाने वाला” या “कमजोरी दूर करने वाला” बताया जाता है। नियामक का कहना है कि इस तरह के दावों को मौजूदा नियमों के तहत स्वीकार्य नहीं माना जा सकता, जब तक उनके समर्थन में निर्धारित मानकों के अनुरूप वैज्ञानिक और नियामकीय आधार उपलब्ध न हों।

इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या संबंधित कंपनियों को अपनी पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा। यदि नियामकीय प्रक्रिया के बाद FSSAI यह निष्कर्ष निकालता है कि मौजूदा दावे नियमों के अनुरूप नहीं हैं, तो कंपनियों को अपने उत्पादों पर लिखी जानकारी और प्रचार सामग्री में संशोधन करना पड़ सकता है।

यह मामला केवल शब्दों या मार्केटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को दी जाने वाली जानकारी की पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। खाद्य उत्पादों पर किए जाने वाले किसी भी दावे का उद्देश्य उपभोक्ता को सही और प्रमाणिक जानकारी देना होना चाहिए। इसी कारण खाद्य सुरक्षा नियमों में लेबलिंग और स्वास्थ्य संबंधी दावों के लिए अलग-अलग प्रावधान बनाए गए हैं।

हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि फिलहाल FSSAI द्वारा केवल नोटिस जारी किए गए हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कंपनियों को दोषी ठहरा दिया गया है। नियामकीय प्रक्रिया के तहत कंपनियों को अपना पक्ष रखने और नोटिस का जवाब देने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध तथ्यों और नियमों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

यदि भविष्य में इस मामले में कोई नया मानक या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, तो उनका असर केवल कुछ ब्रांडों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पेय पदार्थ उद्योग की मार्केटिंग और लेबलिंग नीति पर पड़ सकता है। इससे कंपनियों को अपने विज्ञापन, पैकेजिंग और उपभोक्ताओं से किए जाने वाले दावों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

फिलहाल सभी की नजर FSSAI की आगे की कार्रवाई और कंपनियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या लोकप्रिय ब्रांडों को अपनी पैकेजिंग और प्रचार में बदलाव करना होगा या वे अपने दावों के समर्थन में आवश्यक स्पष्टीकरण और साक्ष्य प्रस्तुत कर पाएंगे। तब तक यह मामला जांच और आधिकारिक प्रक्रिया के अधीन है।

written by:- Anjali Mishra

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Livenewsx
Livenewsxhttp://www.livenewsx.in
we are digtal news platform.we are covering social facts politics national international news breaking
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments