मध्य-पूर्व में तनाव कम होने के बजाय लगातार नए मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। कतर से भारत की ओर आ रहे एक व्यापारिक जहाज पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कथित ड्रोन हमले की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। जहाज पर कुल 29 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 4 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं और अब तक किसी के घायल होने या किसी बड़े पर्यावरणीय नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पश्चिम एशिया में हालात वास्तव में सामान्य हो रहे हैं, या क्षेत्र अब भी गंभीर सुरक्षा संकट से गुजर रहा है। दुनिया की नजर अब इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस गुजरती है। ऐसे में यहां होने वाली किसी भी सैन्य या सुरक्षा संबंधी घटना का असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में लगातार बढ़ती अस्थिरता वैश्विक बाजारों के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है।
हाल के दिनों में इस समुद्री मार्ग पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ी हैं। तीन जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया। अब सामने आई नई रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम द्वीप, बंदर अब्बास और सीरिक क्षेत्र में हवाई कार्रवाई की है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ईरानी मीडिया ने कई इलाकों में तेज धमाकों की आवाजें सुनाई देने का दावा किया है। इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में एक बार फिर युद्ध जैसी आशंकाओं को हवा दे दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला आगे बढ़ता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया के कई देश, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग और वैश्विक ऊर्जा बाजार सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी खाड़ी देशों में कार्यरत हैं।
भारत के संदर्भ में राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद चारों भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। फिर भी ऐसी घटनाएं भारतीय समुद्री सुरक्षा और विदेश नीति के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। भारत लगातार क्षेत्र में शांति, संवाद और सुरक्षित समुद्री मार्गों की वकालत करता रहा है। ऐसे समय में भारतीय एजेंसियां और विदेश मंत्रालय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों और समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई दावे और प्रतिदावे सामने आ रहे हैं। आधिकारिक एजेंसियों की ओर से आने वाली पुष्टि और आगे की जांच के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा कि ड्रोन हमले और सैन्य कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। लेकिन इतना तय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन चुका है। अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी है, क्योंकि आने वाले फैसले न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा व्यवस्था पर गहरा असर डाल सकते हैं।
written by :- Anjali Mishra
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