सोनम वांगचुक के समर्थन में चल रहे आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर जंतर-मंतर पहुंचीं और उन्होंने वांगचुक के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि शिक्षा, युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
डॉ. रागिनी सोनकर ने कहा कि वह खुद एक छात्रा रही हैं और जिस सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि से आती हैं, वहां से एक महिला का इस मुकाम तक पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि संघर्ष, शिक्षा और मेहनत के दम पर ही वह आज इस स्थिति तक पहुंची हैं, इसलिए शिक्षा से जुड़े किसी भी मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब इतिहास लिखा जाएगा, तब नई पीढ़ियां हमसे सवाल करेंगी कि जब सोनम वांगचुक शिक्षा और जनहित के मुद्दों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे, तब हम क्या कर रहे थे। उनके मुताबिक, ऐसे समय में चुप रहना भी एक तरह की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना है।
रागिनी सोनकर ने लोगों से अपील की कि वे इस आंदोलन को किसी राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज के भविष्य के सवाल के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि अगर आज आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां इसकी कीमत चुका सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज को मजबूत बनाने, बराबरी का अवसर देने और देश के भविष्य को दिशा देने का सबसे बड़ा माध्यम है। इसलिए शिक्षा और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सभी को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
जंतर-मंतर पर उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों के साथ एकजुटता दिखाई और कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर संवाद का रास्ता अपनाएंगे।
फिलहाल सोनम वांगचुक का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। एक ओर उनके समर्थक इसे जनहित और शिक्षा से जुड़ा आंदोलन बता रहे हैं, तो दूसरी ओर इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।
written by:- Anjali Mishra
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