दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का आंदोलन अब सिर्फ एक भूख हड़ताल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक बहस और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच शुक्रवार देर रात उनके ऊपर कथित हमले की कोशिश की खबर सामने आई, जिसके बाद माहौल और ज्यादा गरमा गया।
इस घटना की जानकारी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए दी। दावा किया गया कि कुछ लोगों ने सोनम वांगचुक की तरफ एक वस्तु फेंकी, हालांकि उन्हें किसी तरह की चोट नहीं लगी। फिलहाल इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
सोनम वांगचुक का नाम पहले से ही देशभर में चर्चा में रहा है। पर्यावरण, शिक्षा और लद्दाख के मुद्दों को लेकर आवाज उठाने वाले वांगचुक अब NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं। उनका आंदोलन छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को सामने ला रहा है, जिसके चलते राजनीतिक दल भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
इसी बीच फिल्म अभिनेता आमिर खान का बयान सामने आने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। लंबे समय से लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा था कि फिल्म ‘3 इडियट्स’ के मशहूर किरदार ‘फुंसुख वांगडू’ और सोनम वांगचुक के बीच संबंधों को लेकर आमिर खान चुप क्यों हैं। अब आमिर खान ने कहा कि फिल्म का किरदार सीधे तौर पर सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई।
आमिर खान के बयान पर विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि आमिर खान सरकार के खिलाफ बोलने से बच रहे हैं और डर की वजह से खुलकर अपनी बात नहीं रख रहे। वहीं आरजेडी सांसद मनोज झा ने भी तंज कसते हुए कहा कि सत्ता के सामने अपनी बात मजबूती से रखना आसान नहीं होता। इन बयानों के बाद सोनम वांगचुक का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया।
इस बीच विपक्ष की ओर से सोनम वांगचुक के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा गया। आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक को सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन अस्पताल ले जाया गया और उनके साथियों को हिरासत में लिया गया। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए सवाल उठाए हैं।
विपक्षी नेताओं ने इस मामले को पहले के आंदोलनों से भी जोड़ने की कोशिश की। उनका कहना है कि इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों और महिला पहलवानों के आंदोलन के दौरान भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिली थी। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि सरकार और प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर अलग-अलग पक्ष सामने आ सकते हैं, लेकिन सोनम वांगचुक के आंदोलन ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन की सीमा क्या होनी चाहिए और सरकार की जिम्मेदारी क्या है। सवाल अब यही है कि क्या शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वालों को पर्याप्त जगह और सुरक्षा मिल रही है, या फिर विरोध की आवाज सिर्फ राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से सुनी जाती है?
सोनम वांगचुक का आंदोलन अब शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के भविष्य, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कोई समाधान निकलता है या फिर यह मुद्दा देश की राजनीति में और बड़ा विवाद बनता जाता है।
written by :- Anjali Mishra
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