दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के समर्थन में चल रहे आंदोलन के बीच अब माहौल तनावपूर्ण होता दिखाई दे रहा है। ‘संसद चलो’ मार्च से पहले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे और संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसमें लाठीचार्ज और झड़प की खबरें सामने आईं। हालांकि पूरे मामले की तस्वीर आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
प्रदर्शनकारियों का मकसद संसद तक मार्च निकालकर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखना था। लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए न तो कोई अनुमति मांगी गई थी और न ही प्रशासन की ओर से कोई मंजूरी दी गई थी। संसद के मानसून सत्र को देखते हुए नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही सख्त कर दी गई थी और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि नई दिल्ली क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है। इसके तहत जंतर-मंतर के निर्धारित प्रदर्शन स्थल के अलावा किसी भी जगह पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने, जुलूस निकालने या प्रदर्शन करने पर रोक है। पुलिस ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इसी बीच सोनम वांगचुक की पत्नी ने आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर राजनीतिक नेता अस्पताल में सोनम वांगचुक से मुलाकात कर उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि संसद सत्र में शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े मुद्दे को उठाया जाएगा, तो सोनम वांगचुक अपनी भूख हड़ताल खत्म कर सकते हैं।
इस बयान के बाद आंदोलन की दिशा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पीछे हट गई है? क्या 20 जुलाई का प्रस्तावित संसद मार्च सिर्फ संसद में चर्चा और नेताओं के आश्वासन तक सीमित रह जाएगा? या फिर आंदोलन पहले की मांगों के साथ ही आगे बढ़ेगा?
वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस भी पूरी तैयारी में नजर आ रही है। जानकारी के मुताबिक जंतर-मंतर पर चल रहे धरने को खत्म कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों की भी तैनाती की गई है। प्रशासन का कहना है कि संसद सत्र के दौरान राजधानी में किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती को रोकना उनकी प्राथमिकता है।
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर हैं। उनके आंदोलन को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है और कई राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं।
अब आने वाले कुछ घंटे इस आंदोलन के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, वहीं पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रही है। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर है कि संसद मार्च से पहले सरकार, प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच कोई रास्ता निकलता है या फिर टकराव और बढ़ता है|
written by:- Anjali Mishra
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