उत्तर प्रदेश में कड़ाके की सर्दी और घना कोहरा लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह उलट-पुलट कर चुका है। कई जिलों में गुरुवार को हालात ऐसे रहे कि विजिबिलिटी लगभग जीरो तक पहुंच गई, जिससे सड़कों पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं था। वाहन रेंगते नजर आए, लोग देर से दफ्तर पहुंचे और सुबह का सफर मानो धैर्य की परीक्षा बन गया। पहाड़ों में हो रही बर्फबारी का असर अब साफ तौर पर मैदानी इलाकों में महसूस किया जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को कोहरे में हल्की कमी संभव है, लेकिन राहत नाममात्र की ही रहेगी। कोहरा भले थोड़ा कम हो जाए, मगर गलन और ठंडी हवाएं लोगों को परेशान करती रहेंगी। सुबह और शाम की ठंड इतनी तीखी है कि हाड़ कंपने लगते हैं, जबकि दिन में धूप निकलने पर थोड़ी देर के लिए राहत मिल जाती है। प्रयागराज और कुशीनगर में घने कोहरे की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है।
इस बार की ठंड को लोग “सूखी ठंड” कह रहे हैं ऐसी ठंड जो बिना बारिश के सीधे शरीर के अंदर तक घुस जाती है। नमी न होने की वजह से हवा ज्यादा चुभती है और यही कारण है कि मोटे कपड़े पहनने के बावजूद लोग ठिठुरते नजर आ रहे हैं। ठंड का असर सिर्फ आराम और यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेहत पर भी सीधा वार कर रही है।
कड़ाके की ठंड और बढ़ता वायु प्रदूषण मिलकर दिल के मरीजों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके हैं। एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ प्रो. एमयू रब्बानी बताते हैं कि तापमान में केवल 1 डिग्री की गिरावट भी हार्ट अटैक का खतरा करीब 2% तक बढ़ा देती है। सर्दियों में यह जोखिम सामान्य दिनों की तुलना में 20 से 50 प्रतिशत तक ज्यादा हो जाता है।
अस्पतालों की ओपीडी भी इस खतरे की गवाही दे रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, गर्मियों की तुलना में सर्दियों में 20–30% ज्यादा हृदय रोगी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वजह साफ है ठंड लगते ही शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, और ऊपर से प्रदूषण दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल देता है। छोटी-सी ठंड, लेकिन दिल के लिए बड़ा खतरा।
इसी बीच लोगों के मन में एक आम सवाल घूम रहा है “जैकेट पहनने के बाद भी ठंड क्यों लग रही है?” जवाब थोड़ा चौंकाने वाला है, पर सच्चा भी। गलती आपकी जैकेट की नहीं, बल्कि ठंड की तीव्रता की है। इस बार सर्दी इतनी तेज है कि हर जैकेट उसका मुकाबला नहीं कर पा रही। ठंडी हवा सीधे शरीर तक पहुंच रही है और कंपकंपी छुड़वा रही है।
सर्दियों में खुद को सुरक्षित रखने के लिए सही जैकेट चुनना बेहद जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक डाउन फेदर जैकेट और पफर जैकेट ही ऐसी विकल्प हैं जो असली सुरक्षा देती हैं। डाउन फेदर जैकेट खास इसलिए होती है क्योंकि इसे हंस या बतख के मुलायम पंखों से बनाया जाता है, जो शरीर की प्राकृतिक गर्मी को बनाए रखते हैं।
ये जैकेट न सिर्फ हल्की होती हैं, बल्कि विंडप्रूफ भी होती हैं और हल्की नमी से भी बचाव करती हैं। यानी ठंडी हवा को अंदर घुसने का मौका ही नहीं मिलता। तेज गलन वाले मौसम में यही जैकेट शरीर के लिए ढाल बन जाती है।
कुल मिलाकर, यूपी में ठंड ने इस बार हर मोर्चे पर परीक्षा ले रखी है यातायात, सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी, तीनों प्रभावित हैं। सर्दी से बचना है तो लापरवाही नहीं, समझदारी जरूरी है। दिल का ख्याल रखें, प्रदूषण से बचें और सबसे जरूरी सही जैकेट को ही अपना असली हथियार बनाएं।
Written by :- Anjali Mishra
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