उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के आरोपों से घिरे छांगुर बाबा अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निशाने पर आ गए हैं। ईडी ने बाबा के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई यूपी एसटीएफ (विशेष कार्यबल) और एटीएस (एंटी टेररिज़्म स्क्वॉड) की उन रिपोर्टों के आधार पर की गई है, जिनमें छांगुर बाबा पर सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण कराने और इस प्रक्रिया के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग प्राप्त करने के आरोप लगाए गए हैं। अब ईडी का फोकस इस बात की गहराई से जांच करने पर है कि इन गतिविधियों के पीछे कौन-कौन आर्थिक रूप से सक्रिय थे और क्या इन गतिविधियों को विदेशों से भी समर्थन मिल रहा था।
ईडी की शुरुआती जांच में पता चला है कि छांगुर बाबा और उनके सहयोगियों के नाम से करीब दो दर्जन बैंक खाते संचालित हो रहे हैं। इन खातों में बड़ी मात्रा में लेन-देन हुआ है, जिसकी समय-सीमा, स्रोत और उपयोग को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि इन खातों के जरिए विदेशों से मोटी रकम ट्रांसफर की गई, जिसे धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया हो सकता है। खासकर यह भी देखा जा रहा है कि क्या इन खातों में फर्जी एनजीओ या सामाजिक सेवा के नाम पर पैसा भेजा गया और फिर उसे किसी गुप्त एजेंडे के तहत धार्मिक रूपांतरण के लिए इस्तेमाल किया गया।
सूत्रों के अनुसार, छांगुर बाबा लंबे समय से कुछ खास समुदायों में “सेवा” के नाम पर सक्रिय थे और गरीब व कमजोर वर्गों को विभिन्न प्रलोभनों के जरिए प्रभावित कर रहे थे। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार जैसी सुविधाओं के जरिए वह लोगों का विश्वास जीतते और फिर उन्हें धर्म बदलने के लिए प्रेरित करते। इन गतिविधियों में उनकी सहायता करने वाले सहयोगियों का एक संगठित नेटवर्क भी सामने आया है, जिसमें कथित रूप से कुछ स्थानीय नेता, एनजीओ कार्यकर्ता और विदेशी संपर्क भी शामिल हैं। यही वजह है कि मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति पर केंद्रित नहीं रह गया है, बल्कि इसके तार एक बड़े षड्यंत्र से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
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यूपी एसटीएफ और एटीएस की रिपोर्टों में छांगुर बाबा के खिलाफ गंभीर साक्ष्य दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि धर्मांतरण की यह प्रक्रिया केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं थी, बल्कि एक “सिस्टमेटिक कन्वर्ज़न मिशन” के तौर पर काम कर रही थी। जिन लोगों का धर्म बदला गया, उनसे संपर्क के बाद यह भी पता चला कि कई बार उन्हें आर्थिक सहायता, मुफ्त राशन, बच्चों की फीस माफ़ी और नौकरी तक का झांसा दिया गया। इन आरोपों ने कानून व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। इसी वजह से राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ईडी और अन्य जांच एजेंसियों को इसके आर्थिक पहलुओं की गहराई से जांच का आदेश दिया।
अब जबकि मामला ईडी के दायरे में आ गया है, तो इसकी कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। अगर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप सिद्ध होते हैं तो छांगुर बाबा और उनके नेटवर्क पर शिकंजा कसना तय है। फिलहाल कई बैंक खातों को ट्रैक किया जा रहा है, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और ईमेल्स को खंगाला जा रहा है, और कुछ प्रमुख सहयोगियों से पूछताछ की तैयारी भी चल रही है। यह मामला अब सिर्फ धार्मिक या सामाजिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी फंडिंग जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि यह धर्मांतरण का मामला था या इसके पीछे कोई गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश भी छुपी हुई थी।
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