साल 2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से कुल मिलाकर लगभग 1.58 लाख करोड़ रुपये की बड़ी निकासी की। यह आंकड़ा भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि विदेशी निवेश भारतीय बाजार की स्थिरता और तरलता के लिए अहम माना जाता है। इस साल की सबसे बड़ी बिकवाली वित्तीय सेवाओं और आईटी सेक्टर में देखने को मिली, जिससे इन क्षेत्रों के शेयरों में दबाव बढ़ गया।
वित्तीय सेवाओं में निकासी का असर सीधे बैंकों और बीमा कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। वहीं आईटी सेक्टर में विदेशी निवेशकों के हाथ से निकलने के कारण कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। इन दोनों क्षेत्रों में बिकवाली के चलते कुल मिलाकर 7 बड़ी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 35 हजार करोड़ रुपये घट गया। निवेशकों की इस प्रतिक्रिया ने बाजार की संवेदनशीलता को और उजागर कर दिया।
हालांकि हेल्थ और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेशकों की रुचि इस दौरान बनी रही। इन सेक्टरों के शेयरों में अपेक्षाकृत स्थिरता रही और कुछ निवेशकों ने यहां नए अवसर तलाशे। इससे यह संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक केवल लाभकारी और स्थिर क्षेत्रों में ही निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि रुपये में उतार-चढ़ाव इस बड़ी बिकवाली की एक अहम वजह रही। विदेशी निवेशक अक्सर मुद्रा अस्थिरता के समय अपने निवेश को सुरक्षित करने के लिए बाहर निकाल लेते हैं। इसी के चलते भारतीय रुपया कमजोर होने के समय बाजार में दबाव और बढ़ गया।
इसके अलावा अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में बदलाव को भी निवेशकों की निकासी के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर निवेशकों का नजरिया बदलने के कारण भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा बाहर जाने की प्रवृत्ति बढ़ गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी से भारतीय बाजार के लंबी अवधि के निवेश पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को इस समय सतर्क रहने और बाजार की हलचल को समझते हुए रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
इसके साथ ही, सरकारी नीतियां और बाजार सुधार के कदम निवेशकों के भरोसे को फिर से बहाल कर सकते हैं। वित्तीय और आईटी सेक्टर में लंबे समय के निवेश अवसर अभी भी मजबूत बने हुए हैं, और विशेषज्ञ इन क्षेत्रों में धैर्य रखने की सलाह दे रहे हैं।
कुल मिलाकर, साल 2025 में FPI की बड़ी निकासी ने बाजार में अस्थिरता पैदा की, लेकिन हेल्थ और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कुछ सेक्टरों में निवेशकों की रुचि जारी रही। रुपया अस्थिरता और वैश्विक व्यापार नीतियों के चलते यह निकासी हुई, और अब बाजार की निगाहें अगले साल के निवेश और सुधार प्रयासों पर लगी हैं।
written by :- Vijay Shukla
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