संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिनी जाती है। इसे पास करना पारंपरिक तौर पर IAS अफसर बनने का मुख्य रास्ता माना जाता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में हिस्सा लेते हैं, लेकिन सफलता पाना आसान नहीं होता। कठिन चयन प्रक्रिया और कड़ी तैयारी के बावजूद हर बार सभी उम्मीदवार सफल नहीं हो पाते।हालांकि, आईएएस बनने का एक वैकल्पिक मार्ग भी मौजूद है जिसे “लेटरल एंट्री” कहा जाता है। यह एक खास भर्ती प्रक्रिया है, जिसमें सरकार विशेषज्ञों और अनुभवी पेशेवरों को सीधे प्रशासनिक पदों पर नियुक्त करती है। इसमें UPSC परीक्षा पास करना जरूरी नहीं होता।
लेटरल एंट्री का मकसद शासन में नई सोच, विशेषज्ञता और पेशेवर दृष्टिकोण लाना है। निजी क्षेत्र, पब्लिक सेक्टर (PSUs) और शैक्षणिक संस्थानों के अनुभवी लोग इस प्रक्रिया के जरिए सरकार में शामिल हो सकते हैं। इससे नीतियों और निर्णयों में व्यावहारिक और तकनीकी दृष्टिकोण जोड़ने में मदद मिलती है।
इस प्रक्रिया के तहत नियुक्त अधिकारी मिड और सीनियर स्तर के प्रशासनिक पदों पर काम करते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि शासन में नई ऊर्जा और दक्षता आ सके। लेटरल एंट्री अधिकारियों की विशेषज्ञता सीधे परियोजनाओं, नीति निर्माण और सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में योगदान देती है
लेटरल एंट्री पहल नीति आयोग की सिफारिश पर शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य सरकार में दक्षता, नवाचार और विशेषज्ञता बढ़ाना है। यह कदम पारंपरिक UPSC मार्ग को पूरी तरह खत्म नहीं करता, बल्कि उसके साथ-साथ पेशेवर विशेषज्ञों को भी प्रशासनिक प्रणाली में शामिल करने का अवसर देता है।
संक्षेप में कहा जा सकता है कि लेटरल एंट्री IAS बनने का एक वैकल्पिक और प्रभावी रास्ता है। यह न केवल शासन में दक्षता बढ़ाने में मदद करता है बल्कि नीतियों में विशेषज्ञता और नवाचार लाने का अवसर भी प्रदान करता है। इस प्रक्रिया से सरकारी निर्णय और योजनाएं और अधिक पेशेवर, व्यावहारिक और प्रभावी बनती हैं।
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