भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने लव जिहाद को लेकर बड़ा और कड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और हमारा समाज केवल महिलाओं की वजह से ही सुरक्षित है। भागवत ने यह स्पष्ट किया कि केवल कानून बनाकर या सरकारी नियमों से इस समस्या को हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए सबसे जरूरी कदम है परिवार और घर को मजबूत बनाना।
उन्होंने कहा कि लव जिहाद को रोकने की शुरुआत कानून से नहीं, बल्कि घर और परिवार से करनी चाहिए। उनका मानना है कि बेटी या महिला के प्रति परिवार का रवैया, उनके साथ विश्वास और संवाद ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। घर में आपसी बातचीत और समझ का अभाव ऐसे हालात पैदा करता है, जहां बाहरी प्रभावों के चलते युवतियां बहक सकती हैं।
भागवत ने सवाल उठाया-“आखिर हमारी बेटी किसी अजनबी के बहकावे में कैसे आ जाती है?” उनका कहना है कि इस समस्या की जड़ परिवार में बातचीत की कमी है। जब माता-पिता और बच्चों के बीच खुला संवाद नहीं होता और घर में रिश्ते केवल औपचारिक या कठोर रहते हैं, तब युवा प्रभावित होने के लिए बाहरी माहौल पर निर्भर हो जाते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समाज को सुरक्षित रखना है, तो सबसे पहले परिवार मजबूत होना चाहिए। माता-पिता को अपनी बेटियों और बेटों के साथ विश्वास का रिश्ता बनाना होगा। यह केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। बेटियों के साथ भरोसा, समझ और खुला संवाद ही उन्हें बाहरी खतरे से बचा सकता है।
भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा कि बेटियों और महिलाओं के लिए केवल नियम और क़ानून पर्याप्त नहीं हैं। समाजिक और पारिवारिक संरचना में बदलाव लाना बेहद जरूरी है। घर में बच्चों के साथ बातचीत, उनकी भावनाओं और विचारों को समझना, और उनके निर्णयों में मार्गदर्शन करना इस दिशा में पहला कदम है।
उनका यह भी कहना है कि यदि घर का माहौल सकारात्मक और सहयोगात्मक होगा, तो लड़कियां बिना भय या दबाव के अपनी जिंदगी के फैसले ले सकेंगी। इसके विपरीत, अगर घर में दूरी, संकोच और संवाद की कमी होगी, तो वे बाहरी दबाव और प्रभाव के प्रति संवेदनशील बन जाती हैं।
मोहन भागवत ने परिवार को समाज की बुनियाद बताया और कहा कि जब तक परिवार मजबूत नहीं होगा, तब तक समाज की सुरक्षा की कल्पना अधूरी है। बेटियों के साथ विश्वास और समझ का रिश्ता बनाना हर परिवार की जिम्मेदारी है। यह केवल बेटी की सुरक्षा नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।
उन्होंने कहा कि लव जिहाद जैसी समस्याओं से निपटना केवल कानून या पुलिस का काम नहीं है। यह सामाजिक जागरूकता, परिवारिक शिक्षा और घर में सही मूल्यों का निर्माण करने का मुद्दा है। परिवार के मजबूत होने से ही युवा सही मार्ग पर चलेंगे और समाज भी सुरक्षित रहेगा।
कुल मिलाकर, मोहन भागवत का संदेश स्पष्ट है कि समाज की सुरक्षा की शुरुआत घर और परिवार से होती है। बेटियों के साथ भरोसा, समझ और खुला संवाद ही ऐसे हालात पैदा करता है, जहां युवा बहकावों से बचकर सही दिशा में आगे बढ़ सकें। कानून और नियम जरूरी हैं, लेकिन असली सुरक्षा का आधार मजबूत परिवार ही है।
written by :- Anjali Mishra
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