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उत्तराखंड में UCC लागू हुए एक साल, सिस्टम में 20 गुना तेजी और पारदर्शिता !

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हुए अब एक साल होने वाला है, और धामी सरकार ने इस दौरान के ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं। आंकड़े बताते हैं कि इस नए कानून ने राज्य के नागरिकों के लिए शादी, तलाक और लिव-इन संबंधी प्रक्रियाओं को बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया है।

सबसे बड़ा बदलाव शादी का रजिस्ट्रेशन अब पूरी तरह ऑनलाइन हो गया है। पहले जहां रोज़ाना केवल 67 शादियों का रजिस्ट्रेशन होता था, वहीं अब औसतन 1400 शादियाँ रोज़ रजिस्टर्ड हो रही हैं। यानी करीब 20 गुना तेजी! यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि डिजिटल सिस्टम ने लोगों के समय और मेहनत दोनों की बचत की है।

UCC लागू होने के बाद तलाक की प्रक्रिया भी सरल हुई है। राज्य में अब तक 316 लोगों ने ऑनलाइन तलाक प्रमाणपत्र प्राप्त किया है। इससे पहले की तुलना में यह प्रक्रिया न केवल तेज हुई है, बल्कि लोगों के लिए सुरक्षित और पारदर्शी भी बन गई है।

लिव-इन रिलेशनशिप को भी आधिकारिक मान्यता मिली है। आंकड़ों के अनुसार 68 कपल ने लिव-इन का रजिस्ट्रेशन कराया है, जबकि 2 जोड़ों ने अपने लिव-इन रिलेशनशिप को खत्म करने का सर्टिफिकेट भी ऑनलाइन लिया। यह पहल लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित करती है।

सरकार का दावा है कि अब अधिकांश शादी के सर्टिफिकेट 5 दिन के अंदर जारी कर दिए जा रहे हैं, जबकि तय समय सीमा 15 दिन थी। यह बदलाव साफ दिखाता है कि प्रशासन ने प्रक्रिया को तेज और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि UCC ने ना केवल सिस्टम को डिजिटल और पारदर्शी बनाया है, बल्कि नागरिकों के लिए भरोसे और सुविधा दोनों को भी बढ़ाया है। लोग अब लंबी लाइनों और कागजी झंझट से बच रहे हैं और उनकी प्रक्रियाएं कहीं अधिक सरल हो गई हैं।

इस कानून के लागू होने से सामाजिक संरचना पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। विवाह, तलाक और लिव-इन संबंधी कानूनों में स्पष्टता और पारदर्शिता ने लोगों में कानूनी जागरूकता बढ़ाई है। नागरिक अब आसानी से अपने अधिकारों और प्रक्रियाओं की जानकारी ऑनलाइन हासिल कर सकते हैं।

UCC की यह पहल राज्य में डिजिटल गवर्नेंस का बेहतरीन उदाहरण भी बन गई है। यह दर्शाता है कि तकनीक और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से नागरिकों के जीवन को सहज और तेज बनाया जा सकता है।

साफ है कि एक साल में उत्तराखंड में UCC ने सिस्टम को न केवल तेज किया है, बल्कि नागरिकों के लिए पारदर्शी और भरोसेमंद भी बनाया है। यह साबित करता है कि सही नीति और डिजिटल प्लेटफॉर्म का मेल सामाजिक सुधार और प्रशासनिक दक्षता दोनों में बड़ा बदलाव ला सकता है।

written by :- Anjali Mishra

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