सीतापुर का राजनीतिक तापमान एक बार फिर तेज हो गया है। भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी का एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। इस वीडियो में वे भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं को ‘नीले कबूतर’ कहकर संबोधित करते दिखाई देते हैं टिप्पणी जिसे तुरंत अपमानजनक और भड़काऊ माना गया। यह बयान सेउता में हुई एक स्थानीय सभा के दौरान दिया गया, जहाँ उनके भाषण में अचानक यह विवादित शब्द निकल गया। लेकिन राजनीति में एक पल की जुबान फिसलन भी तूफान पैदा कर देती है, और यही इस मामले में भी हुआ।
विडियो वायरल होने के कुछ ही घंटों में भीम आर्मी के कार्यकर्ता खुलकर विरोध में उतरे। उन्होंने विधायक के खिलाफ अपना गुस्सा जताया, इसे एक समुदाय विशेष पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि यह भाषा लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। जहां-जहां भी यह वीडियो पहुंचा, वहाँ-वहाँ प्रतिक्रिया और नाराजगी बढ़ती गई। राजनीतिक गलियारों में इस वीडियो ने मानो आग में घी डालने का काम किया।
विधायक ज्ञान तिवारी की ओर से यह दावा किया गया कि बयान ‘जुबान फिसलने’ की वजह से आया था और उनका किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं था। लेकिन विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इसे अनदेखा करने से साफ इनकार कर दिया। उनके मुताबिक, किसी जनप्रतिनिधि से इस तरह की टिप्पणी की उम्मीद नहीं की जाती और अगर ऐसे शब्द निकलते हैं, तो यह सिर्फ फिसलन नहीं, सोच की झलक भी होता है।
सोशल मीडिया पर भी माहौल बेहद उग्र है। समर्थक और विरोधी आमने-सामने हैं। एक पक्ष इसे अनजाने में कहा गया शब्द बता रहा है, जबकि दूसरा इसे योजनाबद्ध और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बयान करार दे रहा है। ट्विटर, फेसबुक और रील्स पर लगातार वीडियो शेयर हो रहा है, और हर शेयर के साथ बहस की आग और भड़क रही है।
भीम आर्मी के स्थानीय नेताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ शब्दों का नहीं है, बल्कि सम्मान का है। उनका दावा है कि इस तरह के बयान से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, और प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। वे मांग कर रहे हैं कि विधायक को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और सरकार को इस पर उचित कदम उठाने चाहिए।
सीतापुर के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में ऐसे विवाद और भी संवेदनशील हो जाते हैं। एक छोटी सी चिंगारी भी बड़ा दंगा बन सकती है। और यही वजह है कि इस वीडियो का असर सिर्फ सीतापुर तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया आती है और प्रशासन इसे कैसे संभालता है। जिस बयान को विधायक ‘जुबान फिसलना’ बता रहे हैं, वह उनके राजनीतिक सफर में बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है या बड़ी मुश्किल भी।
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