उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर और असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति कर दी, जिससे संकेत मिल रहा है कि जल्द ही निर्वाचन की तारीखों की घोषणा हो सकती है। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से खाली हुए इस पद को लेकर राजनीतिक हलकों में पहले से ही हलचल थी, और अब चुनावी गतिविधियां तेजी पकड़ने लगी हैं।
सूत्रों के अनुसार, अगर सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार चलता है, तो संसद के मौजूदा मानसून सत्र के दौरान ही उपराष्ट्रपति का चुनाव संपन्न कराया जा सकता है। इससे पहले जरूरी है कि अधिसूचना जारी हो, नामांकन की प्रक्रिया चले, और फिर मतदान एवं मतगणना का दौर आए। यह प्रक्रिया आम तौर पर संसद भवन परिसर में ही पूरी कराई जाती है, क्योंकि सांसद ही उपराष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल का हिस्सा होते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव और यूके यात्रा के बाद इस चुनावी प्रक्रिया में और तेजी आने की संभावना है। माना जा रहा है कि बीजेपी नेतृत्व इस पद के लिए किसी सर्वमान्य और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चेहरे की तलाश कर रहा है, ताकि राजनीतिक और सामाजिक संतुलन बना रहे। एनडीए गठबंधन के भीतर भी कुछ नामों पर चर्चा शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
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विपक्षी दल भी इस चुनाव को लेकर अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। पिछली बार विपक्ष ने संयुक्त उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बनाया था, हालांकि जीत एनडीए उम्मीदवार की हुई थी। इस बार भी विपक्ष किसी ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो व्यापक समर्थन हासिल कर सके और सत्ता पक्ष को कड़ी चुनौती दे सके। इस चुनाव को भले ही राष्ट्रपति चुनाव जितनी व्यापकता न मिले, लेकिन इसकी राजनीतिक अहमियत कम नहीं होती।
कुल मिलाकर, उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का यह दौर सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए रणनीतिक परीक्षा की घड़ी बन चुका है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कौन-सा चेहरा इस गरिमामयी पद को संभालने जा रहा है और देश की संवैधानिक राजनीति में कैसी दिशा तय करेगा।
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