मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इस बार श्रद्धा और आस्था का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने एक नया इतिहास रच दिया। हर साल लाखों भक्त यहां माथा टेकते हैं, लेकिन इस बार जो हुआ वह अभूतपूर्व था। मंदिर प्रशासन जैसे-जैसे दान पात्र और भेंट कक्ष खोलता गया, आंकड़े खुद भगवान की कृपा का प्रमाण बनने लगे। पहली बार मंदिर में कुल चढ़ावा करीब 51 करोड़ रुपये तक पहुंच गया यह सिर्फ संख्या नहीं, भक्तों की अटूट आस्था का पर्व था।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती। सिर्फ दान पात्रों से ही 40 करोड़ रुपये निकले, जबकि भेंट कक्ष से 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई। यह वह पल था जब हर कोई दंग रह गया कि आखिर सांवलिया सेठ के दरबार में ऐसा दिव्य सैलाब कैसे उमड़ पड़ा! जैसे-जैसे गिनती आगे बढ़ती गई, मंदिर में बैठे लोग हर नई राशि पर “जय श्री कृष्ण!” के जयकारों से पूरा परिसर गुंजा देते।
छह चरणों में चली इस विशाल गिनती के बाद यह भी सामने आया कि भक्तों ने सिर्फ धन ही नहीं, अपनी भक्ति से भरे अनमोल उपहार भी अर्पित किए लगभग 2 क्विंटल चांदी और 1 किलो सोना। यह सिर्फ भेंट नहीं थी… यह वह भरोसा था जो भक्त अपने आराध्य के चरणों में सौंप कर जाते हैं, यह विश्वास कि सांवलिया सेठ सबकी झोली भर देते हैं।
मंदिर परिसर में माहौल किसी त्योहार से कम नहीं था एक तरफ घंटियों की ध्वनि, दूसरी तरफ जयकारों की लहर, और बीच में सांवलिया सेठ का चमत्कारिक प्रभाव… हर चेहरे पर मुस्कान थी, हर आंख में श्रद्धा। भक्तों ने कहा, “जब-जब मुश्किल आती है, सांवलिया सेठ हमारी नाव पार लगा देते हैं।” शायद यही कारण है कि आस्था का यह सागर हर साल और विशाल होता जा रहा है।
इस ऐतिहासिक चढ़ावे ने मेवाड़ ही नहीं, पूरे राजस्थान में चर्चा छेड़ दी है। लोग कह रहे हैं यह सिर्फ मंदिर का गौरव नहीं, बल्कि लाखों दिलों की धड़कनों का प्रमाण है जो रोज सांवलिया सेठ के चरणों में धड़कती हैं। मंदिर प्रशासन भी इस अभूतपूर्व दान से उत्साहित है और भक्तों को धन्यवाद दे रहा है कि उन्होंने इतने प्रेम से मंदिर की परंपरा को गौरवान्वित किया।
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