सहारनपुर में इकरा हसन के साथ हुई कथित घटना ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरेंद्र मलिक ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और साफ शब्दों में कहा है कि यह मामला “बेहद निंदनीय” है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ एक लड़की के अधिकारों का हनन है, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला मामला है।
हरेंद्र मलिक ने ऐलान किया कि कांवड़ यात्रा के बाद मुजफ्फरनगर में एक बड़ी महापंचायत बुलाई जाएगी। यह महापंचायत राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में होगी, जहां समाज के तमाम वर्गों के प्रतिनिधि जुटेंगे और इकरा हसन को न्याय दिलाने की लड़ाई को और मजबूती दी जाएगी। इसके साथ ही सामाजिक सौहार्द को कैसे बरकरार रखा जाए, इस पर भी मंथन होगा।
उन्होंने अपने बयान में प्रशासन को भी आड़े हाथों लिया और पूछा कि आखिर इस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या कानून व्यवस्था वाकई कमजोर हो चुकी है या फिर किसी दबाव में पुलिस चुप बैठी है? हरेंद्र मलिक ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते न्याय नहीं दिया, तो जनआंदोलन तेज़ किया जाएगा।
हरेंद्र मलिक ने यह भी स्पष्ट किया कि इस महापंचायत का उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और शांति की दिशा में सार्थक कदम उठाना है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों से इसमें शामिल होने की अपील की, ताकि समाज में डर और असमानता का माहौल खत्म हो।
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सांसद ने कहा कि इकरा हसन का मामला केवल एक व्यक्ति या समुदाय का मुद्दा नहीं है, यह समाज की सामूहिक असफलता का आईना है। यदि आज हम चुप रहे, तो कल यह घटना किसी और के साथ भी हो सकती है। इसीलिए महापंचायत का मकसद सिर्फ इकरा को न्याय दिलाना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है।
अब सभी की निगाहें मुजफ्फरनगर की उस महापंचायत पर टिकी हैं, जो न सिर्फ इकरा हसन के लिए न्याय की मांग करेगी, बल्कि एक बड़ी सामाजिक पहल के रूप में भी उभरेगी। सवाल यह है कि क्या यह पंचायत प्रशासन को झकझोर पाएगी, या फिर एक और घटना सिर्फ बयानबाज़ी में ही दबकर रह जाएगी?
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