हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और AIIMS से ट्रेनिंग प्राप्त विशेषज्ञ डॉक्टर सौरभ सेठी का कहना है कि लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का एक अनोखा और सरल तरीका है पैरों की मजबूती। उनके अनुसार हमारे शरीर के निचले हिस्से की मसल्स जितनी मजबूत होंगी, हमारी जीवनशैली और स्वास्थ्य उतना ही बेहतर रहेगा। मजबूत पैरों से न केवल शरीर का संतुलन बेहतर रहता है, बल्कि मेटाबोलिज़्म, ग्लूकोज कंट्रोल और दिमागी स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
डॉ. सेठी का कहना है कि अक्सर लोग BMI और वजन को स्वास्थ्य का मुख्य पैमाना मानते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि पैरों की स्ट्रेंथ अधिक महत्वपूर्ण संकेत देती है। मजबूत पैर उम्र बढ़ने के बावजूद सक्रिय रहने और रोज़मर्रा की चुनौतियों का सामना करने में मदद करते हैं। वहीं, कमजोर पैरों के कारण गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पैरों की मजबूती सीधे हृदय, मेटाबोलिज़्म और न्यूरोलॉजिकल हेल्थ से जुड़ी होती है। जब पैर मजबूत होते हैं, तो रक्त संचार बेहतर होता है, मांसपेशियों में टोन बना रहता है और शरीर की सहनशक्ति भी बढ़ती है। इसके विपरीत, कमजोर पैरों से शरीर जल्दी थकता है और बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
डॉ. सेठी ने जोर देकर कहा कि पैरों को मजबूत बनाने के लिए रोज़ थोड़ा चलना, हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पैरों को सक्रिय रखना बेहद जरूरी है। भले ही समय कम हो, लेकिन हर दिन 20–30 मिनट की वॉक या स्ट्रेचिंग से भी फर्क पड़ सकता है। नियमित व्यायाम पैरों की मसल्स को मजबूत रखने के साथ-साथ जोड़ों और हड्डियों को भी स्वस्थ बनाए रखता है।
उनके अनुसार, पैरों की मजबूती सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। मजबूत पैर संतुलन और स्थिरता प्रदान करते हैं, जिससे फॉल या चोट का डर कम होता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और रोज़मर्रा की गतिविधियां सहजता से की जा सकती हैं।
डॉ. सेठी यह भी बताते हैं कि उम्र बढ़ने पर अक्सर लोग पैरों की अनदेखी कर देते हैं। इससे मसल्स कमजोर होने लगती हैं और सामान्य कार्य जैसे सीढ़ी चढ़ना, लंबे समय तक खड़े रहना या तेज चलना कठिन हो जाता है। इसलिए शुरुआत में ही पैरों पर ध्यान देना लंबी उम्र और बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए अहम है।
अच्छी सेहत और लंबे जीवन के लिए डॉ. सेठी पैरों की स्ट्रेंथ को ‘बॉडी का सेंटर ऑफ पावर’ बताते हैं। उनका कहना है कि केवल योग या जिम ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पैरों की मसल्स को रोज़ाना सक्रिय रखना और संतुलित व्यायाम करना सबसे असरदार तरीका है।
कुल मिलाकर, पैरों की मजबूती और एक्टिव रहने की आदत लंबी उम्र, बेहतर मेटाबोलिज़्म, संतुलित वजन, ग्लूकोज कंट्रोल और मानसिक सेहत के लिए बेहद जरूरी है। रोज़ थोड़ा चलना, स्ट्रेंथ एक्सरसाइज़ करना और पैरों को सक्रिय रखना न सिर्फ बीमारियों से बचाता है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और आत्मनिर्भरता भी बनाए रखता है।
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