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हादसे के बाद भी शो चलता रहा अमेरिकी पायलट का गुस्सा क्यों फूटा?

दुबई एयर शो 2024 में भारत के तेजस लड़ाकू विमान का क्रैश होना दुनिया भर के एविएशन जगत के लिए एक बड़ा हादसा था। हर कोई उम्मीद कर रहा था कि घटना के बाद शो कुछ देर के लिए रोका जाएगा, माहौल शांत किया जाएगा, और उस भारतीय पायलट के प्रति सम्मान जताया जाएगा जिसने जान गंवाई। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि हादसे के कुछ ही मिनट बाद सब कुछ पहले जैसा चलता रहा घोषक उसी ऊर्जा के साथ कमेंट्री कर रहे थे, दर्शकों की तालियां गूंज रही थीं, और पूरा आयोजन ऐसे आगे बढ़ रहा था जैसे आसमान में कोई दुखद घटना हुई ही नहीं। यही दृश्य अमेरिकी एयरफोर्स के मेजर टेलर फेमा हिएस्टर को भीतर तक झकझोर गया।

मेजर टेलर, जो F-16 फाइटर जेट उड़ाते हैं और खुद दुबई एयर शो में परफॉर्म कर रहे थे, इस बात पर यकीन नहीं कर पाए कि दुर्घटना के तुरंत बाद कार्यक्रम बिना रुके चलता रहा। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि आयोजकों ने आखिर क्यों माहौल को ठहरने का मौका भी नहीं दिया। दुनिया के कई देशों में एयर शो के दौरान हादसा होने पर इवेंट तुरंत रोक दिया जाता है दर्शकों, प्रतिभागियों और पूरे एविएशन समुदाय के सम्मान को ध्यान में रखते हुए। लेकिन दुबई में शो का यूँ चलते रहना मेजर को बेहद असंवेदनशील लगा।

मेजर टेलर ने इंस्टाग्राम पर एक लंबा भावुक संदेश लिखकर अपनी भावना साझा की। उन्होंने कहा कि कमेंट्री बॉक्स से उसी तरह की उत्साहित आवाज़ें आ रही थीं, जैसे कुछ हुआ ही न हो। दर्शक खुशी से ताली बजा रहे थे, और आयोजन की ऊर्जा बिल्कुल वैसी ही बनी रही। उन्हें लगा कि यह माहौल न सिर्फ अजीब था बल्कि हादसे में मारे गए भारतीय पायलट नमांश और उनके परिवार के प्रति अन्याय जैसा भी था। मेजर की पोस्ट वायरल हो गई, और दुनिया भर के लोग उनके दृष्टिकोण से सहमत दिखे।

उन्होंने आगे बताया कि उनकी अपनी टीम जिसने शो में आखिरी परफॉर्मेंस करनी थी, ने इस हादसे के बाद प्रदर्शन रद्द कर दिया। मेजर के शब्दों में, “एक साथी पायलट की मौत के बाद मंच पर उतरना हमें सही नहीं लगा।” यह फैसले केवल प्रोफेशनल अनुशासन का नहीं था, बल्कि पायलट बिरादरी की उस भावनात्मक एकता का था, जिसका संबंध देश, रंग या झंडे से नहीं बल्कि एक-दूसरे की जान की कीमत से होता है। उनकी टीम का मानना था कि ऐसे समय में चमक-धमक भरी प्रस्तुति देना पायलट समुदाय के सम्मान के खिलाफ है।

यह बात इसलिए भी ज्यादा मायने रखती है क्योंकि एयर शो दुनिया भर में पायलटों के लिए सिर्फ तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक गहरी भावनात्मक जिम्मेदारी भी होती है। हर पायलट जानता है कि आसमान में हर उड़ान जोखिमों से भरी होती है। और जब किसी सहकर्मी की वही उड़ान उसकी अंतिम उड़ान बन जाती है, तो पूरा समुदाय उसकी याद में रुककर सम्मान देता है। मेजर टेलर ने इसी भावना को सामने रखा कि हादसे के बाद कुछ मिनट रुकना ही मानवता कहलाता है।

दुबई एयर शो के आयोजकों पर सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि इतनी बड़ी दुर्घटना के बावजूद आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट शोक घोषणा या रोक की पहल नहीं की गई। कई अंतरराष्ट्रीय एविएशन विशेषज्ञों ने भी कहा कि यह निर्णय “प्रोफेशनल प्रोटोकॉल” और “मोरल रिस्पॉन्सिबिलिटी” दोनों के खिलाफ था। यह घटना अब वैश्विक चर्चा का हिस्सा बन गई है कि आकस्मिक हादसों के बाद एयर शो में संवेदनशीलता और सम्मान का क्या स्तर होना चाहिए।

अंत में, मेजर टेलर का संदेश केवल आलोचना नहीं बल्कि इंसानियत की याद दिलाता है। उन्होंने दिखाया कि एयरफोर्स की दुनिया में हर पायलट एक-दूसरे का भाई होता है। देशों के झंडे भले अलग हों, लेकिन आसमान साझा होता है। और जब आसमान से कोई गिरता है, तो धरती पर सबको कुछ पल ठहरकर उसकी आखिरी उड़ान को सलाम करना ही चाहिए।

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