नोएडा सेक्टर-75 में एक ऐसा घटना-क्रम सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है | AIMS Max Gardenia प्रोजेक्ट पर ₹2041.79 करोड़ के भारी-भरकम बकाया का बोर्ड कुछ दिनों से लगा था। हजारों घर खरीदारों के लिए यह बोर्ड उम्मीद की आखिरी किरण था—एक सार्वजनिक सबूत कि उनका केस आखिरकार सिस्टम की आंखों में दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसे ही CM योगी आदित्यनाथ का काफिला इसी रास्ते से गुजरने वाला था, कहानी ने एक रहस्यमयी मोड़ ले लिया।
कहानी की शुरुआत उसी समय हुई जब बोर्ड पर अचानक लाल रंग चढ़ा दिया गया—जैसे किसी ने बोर्ड को ‘कम दिखने योग्य’ बनाने की कोशिश की हो। यह दृश्य लोगों को चौंकाने के लिए काफी था। इससे पहले कोई स्थिति समझ पाता, कुछ ही घंटों में पूरा बोर्ड ही गायब कर दिया गया। यह ‘गायबगीरी’ इतनी चतुराई से हुई मानो किसी ने रातों-रात सच को मिटा देना चाहा हो।
इस प्रोजेक्ट में हजारों लोगों ने अपनी जिंदगी की पूरी कमाई लगा दी है, लेकिन बदले में उन्हें मिला क्या?
- रजिस्ट्री बंद
- OC–CC में देरी
- बुनियादी सुविधाओं का अभाव
- और अब, पारदर्शिता पर वार
लंबे समय से फ्लैट खरीदार अपनी आवाज उठाते रहे हैं, लेकिन बिल्डर—प्राधिकरण—सिस्टम की तिकड़ी ने उनके धैर्य को लगातार परखा है।
CM रूट पर लगे ऐसे विशाल बोर्ड का अचानक गायब हो जाना, सिर्फ एक अफवाह या लापरवाही नहीं कहा जा सकता। यह घटना यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं कुछ ऐसा है जो दिखाया नहीं जाना चाहिए—या किसी को डर था कि CM के सामने ये बोर्ड बड़ा सवाल बन जाएगा। ‘किसने हटाया’ से ज्यादा ‘क्यों हटाया’ अब बड़ा सवाल है।
प्राधिकरण ने जांच और FIR की बात कही है, लेकिन पीड़ितों के मन में भरोसा कम और शक ज्यादा है। क्या यह सिर्फ एक औपचारिक बयान है? या सच में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
नोएडा में मौजूद कई अधूरे प्रोजेक्ट के बीच यह घटना एक उदाहरण है कि कैसे जानकारी को काबू में रखने का प्रयास किया जाता है और कैसे जनता को अंधेरे में रखा जाता है।
सबसे बड़ी चिंता यही है कि जब CM के रूट पर ऐसा बोर्ड गायब हो सकता है, तो बाकी जगहों पर आम जनता कितनी सुरक्षित है?
क्या लोगों की शिकायतें तभी सुनी जाएंगी जब वे सोशल मीडिया पर वायरल हों?
क्या नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में सिस्टमेटिक खामियां हैं?
या फिर किसी ने एक बड़ा सच छिपाने के लिए यह खेल खेला?
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