ईरान पर अमेरिका के भीषण हवाई हमलों से वैश्विक तनाव बढ़ा हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इन हमलों में ईरान की तीन प्रमुख परमाणु साइटों को नष्ट कर दिया गया है। ट्रंप ने इसे ‘शांति की दिशा में बड़ा कदम’ बताया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक खतरनाक दांव मान रहे हैं।
ट्रंप, जो अब तक अमेरिका को युद्धों से दूर रखने और वैश्विक शांति के प्रयासों की बात करते रहे हैं, अब खुद एक सैन्य कार्रवाई की अगुवाई कर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर नाराजगी जताई थी, और अब वह इन हमलों को अपनी ‘कूटनीतिक उपलब्धि’ बता रहे हैं।
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एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान पर हमला ट्रंप के लिए एक राजनीतिक जुआ है। उन्होंने अतीत में कई बार अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों की आलोचना की थी कि उन्होंने अमेरिका को “मूर्खतापूर्ण युद्धों” में झोंक दिया। ईरान-इजरायल संघर्ष पर भी ट्रंप ने संयम और समय लेने की बात कही थी, लेकिन रविवार सुबह उन्होंने अचानक इस हमले की जानकारी सार्वजनिक करते हुए अपने प्रशासन की तारीफ की।
इस कदम ने अमेरिकी कांग्रेस में भी चिंता पैदा कर दी है। कई सांसदों ने ट्रंप पर संवैधानिक प्रक्रिया की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। सांसद थॉमस मैसी ने इसे “असंवैधानिक” करार दिया, जबकि डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने कहा कि यह हमला कांग्रेस की मंजूरी के बिना किया गया और इससे अमेरिका एक अंतहीन युद्ध में उलझ सकता है।
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अब सवाल उठ रहे हैं—क्या यह हमला वाकई ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगा पाएगा? या पश्चिम एशिया में अस्थिरता और गहरा जाएगी? विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित कर सकता है।
इतिहास गवाह है कि अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेपों ने कई बार खुद उसे ही जटिल परिस्थितियों में ला खड़ा किया है। अफगानिस्तान और इराक इसके उदाहरण हैं। ऐसे में ट्रंप की यह कार्रवाई फिलहाल वाहवाही तो बटोर सकती है, लेकिन यह उनके लिए राजनीतिक और रणनीतिक चुनौती भी बन सकती है।
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