उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब योगी सरकार के खेमे से जुड़े मंत्री को बंधक बनाने और अगले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को घेरने की बात कहने वाले विधायक बृजभूषण राजपूत के बयान सामने आए। इन बयानों को पार्टी अनुशासन के खिलाफ मानते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बृजभूषण राजपूत से जवाब तलब कर लिया। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
हालांकि, इसी बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने पूरे मामले को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य विधायक बृजभूषण राजपूत के कंधे पर हाथ रखे नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और इसे पार्टी के भीतर समीकरणों से जोड़कर देखा जाने लगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वीडियो सिर्फ एक सामान्य मुलाकात नहीं, बल्कि इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। एक तरफ पार्टी अध्यक्ष द्वारा जवाब तलब किया जाना और दूसरी ओर डिप्टी सीएम के साथ विधायक की नजदीकी की तस्वीर इन दोनों घटनाओं ने यूपी बीजेपी की अंदरूनी राजनीति को सुर्खियों में ला दिया है।
कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश बीजेपी के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरखाने की खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन साधना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बनता जा रहा है। बृजभूषण राजपूत का बयान और उसके बाद सामने आया यह वीडियो उसी तनाव की एक झलक माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह डर है कि इस तरह के बयान और सार्वजनिक विवाद विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे सकते हैं। खासकर तब, जब सरकार खुद कानून-व्यवस्था और अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाने का दावा करती रही है। ऐसे में अपने ही विधायक का इस तरह का बयान पार्टी की छवि पर सवाल खड़े करता है।
वहीं बृजभूषण राजपूत के समर्थक इस पूरे मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि वायरल वीडियो को गलत संदर्भ में देखा जा रहा है और इससे अनावश्यक राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व का सख्त रुख बताता है कि मामला सिर्फ बयान तक सीमित नहीं है।
इस घटनाक्रम ने यह भी साफ कर दिया है कि यूपी बीजेपी में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा। अंदरूनी मतभेद, नेतृत्व को लेकर असंतोष और गुटबाजी जैसी बातें अब धीरे-धीरे सार्वजनिक होती दिख रही हैं। यही वजह है कि हर छोटे संकेत को बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है। क्या बृजभूषण राजपूत के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा या फिर मामला अंदरखाने सुलझा लिया जाएगा यह सवाल अभी खुला हुआ है।
कुल मिलाकर, जवाब तलब से लेकर वायरल वीडियो तक का यह पूरा मामला यूपी बीजेपी की अंदरूनी राजनीति, शक्ति संतुलन और बढ़ती खींचतान को उजागर करता है, जिसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सियासत में हर तस्वीर और हर बयान के अपने गहरे मायने होते हैं।
written by :- Anjali Mishra
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