शहर में ऐसे कई प्राइवेट स्कूल है जिनका स्तर ऊचा है जिनकी पढ़ाई मेहेंगी है और सब कुछ मेहेंगा इसीलिए है क्योकि वो प्राइवेट स्कूल है लेकिन अब प्राइवेट स्कूल सरकारी नियमो का उल्हंघन करने पर उतर आये है जिसके कारण जो गरीब बच्चे है वो प्राइवेट स्कूल में पड़ने से वंचित हो रहे है आपको बता दे की शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानि आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश न देने वाले शहर के 80 निजी स्कूलों का अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी (एनओसी) रद्द कि जाएगी । इस संबंध में बीएसए की ओर से नाम सहित सभी स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है। इसमें 35 स्कूल प्रबंधक ऐसे भी हैं जो आरटीई से जुड़ी डीएम की बैठक में भी नहीं पहुंचे थे।बीएसए की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, गरीब बच्चों को सत्र 2025-26 में 80 निजी स्कूलों ने आरटीई के तहत चयन के बाद भी बच्चों को प्रवेश नहीं दिया।
Also Read: “अखिलेश यादव का संकल्प: ‘सामाजिक न्याय के राज’ से ही बदलेगा देश का भविष्य”
इन सभी स्कूलों से प्रवेश न लेने का कारण तीन दिनों में बताने के लिए कहा गया है। साक्ष्य सहित जवाब न देने पर आरटीई एक्ट 2009 के उल्लघंन, निशुल्क शिक्षा के अधिकार के हनन, शासकीय कार्यों में बाधा डालने के आधार पर विधिक कार्रवाई होगी । इस बार 18 हजार बच्चों का चयन हुआ था। इसमें 3000 हजार अभिभावकों ने निजी स्कूलों की मनमानी से आहत होकर बच्चों का दाखिला कराने से इन्कार किया है। अब आपको बताते है आखिर किन स्कूलों में जारी हुआ नोटिस
सेंट एंथोनी स्कूल पारा, एमजी कॉन्वेंट स्कूल सेक्टर जी कानपुर रोड, बाल विद्या मंदिर स्कूल चारबाग, ट्रिनिटी इंटरनेशनल स्कूल एल्डिको, सेंट क्रिस्ट पब्लिक स्कूल गीतापल्ली, ट्रिनिटी इंटरनेशनल स्कूल आम्रपाली योजना, बालगाइड स्कूल सेक्टर 16 इंदिरा नगर व गोसाईगंज। और भी ऐसे तमाम स्कूल है जो स्कूल प्रवेश नहीं ले रहे हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई की तैयारी है। इन्हें अंतिम नोटिस देकर प्रवेश न लेने का लिखित आधार मांगा गया है। तीन दिनों में जो जवाब नहीं देगा उसके विरुद्ध आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
