back to top
Friday, March 6, 2026
17.8 C
Lucknow
HomeUncategorizedजब भक्ति बनी जीवनसाथी: बदायूं की पिंकी ने कान्हा को लिया पति...

जब भक्ति बनी जीवनसाथी: बदायूं की पिंकी ने कान्हा को लिया पति मान, पूरे गांव ने देखा अद्भुत समर्पण

बदायूं के एक छोटे से गांव में शनिवार का दिन हमेशा के लिए इतिहास बन गया, जब 28 वर्षीय पिंकी ने अपने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय सबके सामने निभाया उन्होंने किसी इंसान नहीं, बल्कि अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार किया। गांव के चौपाल में सजी मंडप, हल्दी की खुशबू, शहनाई की धुन और चारों ओर उमड़े हुए ग्रामीणों की भीड़ सब कुछ वैसा ही था जैसा किसी सामान्य विवाह में होता है, बस फर्क इतना था कि दूल्हा स्वयं गिरिधर नागर थे, जिनके विग्रह को पिंकी ने अपनी गोद में लेकर सात पवित्र फेरे लिए।

पिंकी बचपन से कान्हा की अनन्य भक्त रही हैं। घरवालों के मुताबिक, छोटी उम्र से ही वो साधारण जीवन से ज्यादा उस आध्यात्मिक खिंचाव को महसूस करती थीं जो उन्हें बार-बार कृष्ण के चरणों की ओर खींचता था। चार महीने पहले, जब वह वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करने गईं, तो प्रसाद में उन्हें सोने की एक अंगूठी मिली। यह कोई साधारण घटना नहीं थी पिंकी ने इसे भगवान की स्वीकृति, एक दिव्य संकेत माना कि उनका जीवन अब पूर्ण रूप से कान्हा को ही समर्पित होना चाहिए।

इधर परिवार वाले उनकी शादी के लिए रिश्ते ढूंढने लगे, उधर पिंकी का मन पहले ही निर्णय कर चुका था। उन्होंने साफ कह दिया “मेरा सबकुछ कान्हा हैं।” जिस दृढ़ता और शांति के साथ ये शब्द उनके मुंह से निकले, वह घरवालों और गांव दोनों को भीतर तक छू गया। पिता सुरेश चंद्र शर्मा भावुक हुए और बोले “अगर कान्हा बुलाएंगे, तो हम भी वृंदावन में रहेंगे।” उनकी आंखों में बेटी की ‘अनोखी दुल्हन’ बनने की खुशी के साथ-साथ पिता का गहरा स्नेह भी झलक रहा था।

विवाह का दिन आया तो दृश्य किसी अलौकिक कथा जैसा था। गांव की महिलाएँ हल्दी लेकर आईं, पिंकी ने मेहंदी लगवाई, तिलक की रस्म हुई, बारात की तरह चल रहे भजन और कीर्तन माहौल को भक्ति से भर रहे थे। दावत भी हुई, प्रसाद भी बंटा और सात फेरे वही पवित्र फेरे, लेकिन इस बार समर्पण ने सुहाग का स्थान ले लिया था और भक्ति जीवनसाथी बन चुकी थी।

जब पिंकी ने मंडप में कान्हा के विग्रह को अपनी गोद में लिया, तो गांव की कई महिलाएँ भावुक हो उठीं। कुछ ने कहा “ऐसी भक्ति विरले ही होती है।” कोई बोले “ये सिर्फ विवाह नहीं, तपस्या है।” पूरा गांव इस अनोखे विवाह का साक्षी बना, जहां सांसारिक बंधन से ऊपर उठकर आत्मिक प्रेम और समर्पण ने जीत दर्ज की।

पिंकी का निर्णय जितना असाधारण है, उतना ही मजबूत भी। एक ऐसा युग जहां रिश्तों पर अक्सर प्रश्न उठते हैं, वहां किसी युवती का अपने जीवन को भक्ति के लिए समर्पित कर देना एक साहसिक और प्रेरणादायक कदम है। यह सिर्फ एक विवाह नहीं था, बल्कि उस विश्वास का उत्सव था जो भक्त और भगवान के बीच सबसे पवित्र संबंध बनाता है।

इस पूरी घटना ने गांववालों को ही नहीं, बल्कि दूर-दूर से इसे सुनने वाले लोगों को भी हैरान नहीं, बल्कि भावुक किया है। आज पिंकी सिर्फ दुल्हन नहीं बनीं वो समर्पण की मिसाल बन गईं। और जैसे लोग कह रहे थे “मीरा के प्रभु गिरिधर नागर… ऐसी भक्ति आज भी जीवित है।”

इस भावनात्मक और दिव्य विवाह ने साबित कर दिया कि जब दिल पूरी सच्चाई से पुकारता है, तो भगवान की राह भी साफ नजर आने लगती है।

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Livenewsx
Livenewsxhttp://www.livenewsx.in
we are digtal news platform.we are covering social facts politics national international news breaking
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments