कभी सोचा है, जिसके पास खुद पानी की टंकी हो, वह दूसरे के घर से पानी क्यों लेगा? ऐसा तब होता है जब उसके पास का पानी काम का न हो। कुछ ऐसा ही मामला सऊदी अरब का है। देश का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा रेगिस्तान है, लेकिन फिर भी सऊदी अरब दूसरे देशों से रेत मंगाता है।
इसकी वजह है कि रेगिस्तान की रेत हवा और मौसम के प्रभाव से बहुत चिकनी और गोल हो जाती है। इतनी गोल और नर्म रेत मजबूत कंक्रीट बनाने में काम नहीं आती। कंक्रीट के लिए खुरदरी और नुकीली रेत की जरूरत होती है, जो पत्थरों और नदियों के किनारों से आती है। यही कारण है कि सऊदी अरब को अपने विशाल निर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए विदेशी रेत की जरूरत पड़ती है।
Vision 2030 के तहत सऊदी अरब में NEOM और The Line जैसे महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के लिए करोड़ों टन मजबूत और गुणवत्तापूर्ण रेत चाहिए, जो रेगिस्तान की गोल रेत से संभव नहीं। यही वजह है कि सऊदी अरब को ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से रेत आयात करनी पड़ रही है।
2023 में सऊदी अरब ने ऑस्ट्रेलिया से लाखों डॉलर की रेत खरीदी। यह खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी क्योंकि दुनिया का एक ऐसा देश, जो खुद रेगिस्तान से भरा है, उसे निर्माण के लिए विदेशी रेत की जरूरत पड़ रही थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब की यह रणनीति केवल निर्माण को मजबूत बनाने के लिए नहीं है, बल्कि यह Vision 2030 के बड़े आर्थिक और तकनीकी बदलावों को भी दर्शाती है। बड़े शहर और स्मार्ट सिटी बनाने के लिए उच्च गुणवत्ता की सामग्री की आवश्यकता होती है।
रेत की इस खरीद से यह भी स्पष्ट होता है कि प्राकृतिक संसाधनों की गुणवत्ता ही मायने रखती है, मात्रा नहीं। रेगिस्तान में पर्याप्त रेत हो सकती है, लेकिन अगर वह निर्माण के लिए उपयुक्त न हो, तो देश को विदेश से सामग्री मंगानी पड़ती है।
इस मामले ने वैश्विक मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भी ध्यान आकर्षित किया। लोग हैरान हैं कि रेगिस्तान का देश इतनी रेत के लिए विदेशी बाजार पर निर्भर हो गया। वहीं विशेषज्ञ इसे आधुनिक निर्माण और तकनीकी आवश्यकताओं के नजरिए से सामान्य मान रहे हैं।
सऊदी अरब की यह रणनीति केवल NEOM और The Line तक सीमित नहीं है। देश के अन्य बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और स्मार्ट सिटी योजनाओं के लिए भी विदेशी रेत की जरूरत पड़ सकती है। यह दर्शाता है कि आधुनिक निर्माण में गुणवत्ता ही सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
अंत में यह कहा जा सकता है कि सऊदी अरब का रेत आयात केवल आवश्यकता का मामला नहीं, बल्कि Vision 2030 के महत्वाकांक्षी और आधुनिक निर्माण के लिए एक रणनीतिक कदम है। इसने यह साबित कर दिया कि भले ही आपके पास प्राकृतिक संसाधन हों, अगर उनकी गुणवत्ता सही न हो, तो दुनिया के अन्य देशों से सहयोग लेना पड़ता है।
written by :- Anjali Mishra
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