ईरान और इज़रायल के बीच जारी युद्ध अब एक बेहद गंभीर और खतरनाक चरण में पहुंच चुका है, जिसने पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक स्थिरता पर खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान की सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर किए गए ताजा हमलों ने हालात को और अधिक विस्फोटक बना दिया है। जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि वह “निर्णायक और पूरी ताकत से पलटवार” करेगा, जिससे युद्ध के और अधिक विस्तार की आशंका बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें अमेरिका के हमले की तीखी आलोचना हुई। रूस, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों ने न केवल अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया, बल्कि इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा भी करार दिया। रूस ने कहा कि अमेरिका “एकतरफा हमलों” से पूरी दुनिया को अस्थिरता की ओर धकेल रहा है, जबकि चीन ने कहा कि कूटनीतिक समाधान को नजरअंदाज कर सैन्य हस्तक्षेप करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और खतरनाक है। इस दौरान पाकिस्तान ने भी मुस्लिम देशों के साथ एकजुटता दिखाते हुए अमेरिका को आक्रामकता से बाज आने की सलाह दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक इस युद्ध में 900 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिक शामिल हैं।
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बैठक में कई देशों ने युद्धविराम और मानवीय राहत पहुंचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। फ्रांस और जर्मनी ने भी संयुक्त रूप से कहा कि अगर हालात पर तुरंत काबू नहीं पाया गया, तो यह संघर्ष एक वैश्विक संकट में तब्दील हो सकता है। यूएन महासचिव ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “मानवता एक बार फिर युद्ध की आग में जल रही है और अगर अब भी हम नहीं चेते, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।” इसके अलावा, ईरान के समर्थन में कई इस्लामिक देशों में प्रदर्शन तेज हो गए हैं, और कई जगहों पर अमेरिकी दूतावासों के बाहर विरोध दर्ज किया गया है। अमेरिका फिलहाल अपने नागरिकों को क्षेत्र से निकालने की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं ईरान ने अपने रक्षा प्रतिष्ठानों को हाई अलर्ट पर रखा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध और अधिक भड़का, तो तेल आपूर्ति, वैश्विक बाजार, और राजनीतिक संतुलन तीनों पर इसका विनाशकारी असर पड़ेगा। अब पूरा विश्व इस युद्ध की लपटों से चिंतित है, और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या UNSC कोई ठोस कार्रवाई कर पाएगा या यह सिर्फ एक और औपचारिक बैठक बनकर रह जाएगी।
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