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नाग देवता: रहस्य, परंपरा और विज्ञान की अनोखी दुनिया

भारत में सर्पों को लेकर सदियों से रहस्य, भय और श्रद्धा का अनोखा संगम देखने को मिलता है। हिंदू धर्म में नागों को न केवल पूजनीय माना गया है, बल्कि वे जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म के गहरे प्रतीक भी हैं। इसी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि को लेखक के. हरि कुमार ने अपनी किताब “Naaga: Discovering the Extraordinary World of Serpent Worship” में बारीकी से उकेरा है। यह पुस्तक नाग उपासना की उस अद्भुत परंपरा का अन्वेषण करती है, जो न केवल दक्षिण भारत बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की लोक चेतना में गहराई से रची-बसी है।

लेखक इस पुस्तक में बताते हैं कि नाग उपासना सिर्फ अंधविश्वास या भय से उपजी परंपरा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के संतुलन और प्रजनन शक्ति के सम्मान की अभिव्यक्ति है। सर्पों को जीवनदायी ऊर्जा, भूमि की उर्वरता और जल के रक्षक के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि अनेक भारतीय घरों में आज भी नाग पंचमी पर सर्पों की पूजा की जाती है, और मंदिरों में नाग देवता के लिए विशेष स्थान रखा जाता है। पुस्तक में कई ऐसे मंदिरों, अनुष्ठानों और दंतकथाओं का उल्लेख है, जहां नाग पूजा पीढ़ियों से चली आ रही है और समाज के हर वर्ग से जुड़ी हुई है।

हरि कुमार नागों के पौराणिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों को एक साथ जोड़ते हैं। वे यह भी बताते हैं कि नाग केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी के लिए भी अत्यंत आवश्यक जीव हैं—जो खेतों को चूहों और कीटों से बचाते हैं, और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं। लेखक ने यह भी विश्लेषण किया है कि नागों को भगवान शिव, विष्णु (अनंत शेष) और देवी शक्ति से कैसे जोड़ा गया है। इन सभी व्याख्याओं के माध्यम से वे यह सिद्ध करते हैं कि सर्प भारतीय संस्कृति में ‘रक्षक’ और ‘संरक्षक’ दोनों की भूमिका निभाते हैं।

पुस्तक का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि इसमें दक्षिण भारत में नागों को “प्रत्यक्ष देवता” कहे जाने के कारणों पर गहन अध्ययन किया गया है। केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में आज भी नाग पूजा जीवंत परंपरा के रूप में देखी जाती है, जहां घरों के आंगन में नागकावु (सर्प वन) बनाए जाते हैं और वहां पूजा-अर्चना की जाती है। “Naaga” सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि यह भारतीय सभ्यता के उस अध्याय की यात्रा है, जो आस्था, विज्ञान और लोकविश्वास—तीनों को एक सूत्र में पिरोता है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए अनमोल है जो भारतीय धर्म, मिथक और संस्कृति की जड़ों को गहराई से समझना चाहते हैं।

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