पीडब्ल्यूडी में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी? मुख्यमंत्री के आदेशों की खुलेआम उड़ रही धज्जियाँ!उत्तर प्रदेश का लोक निर्माण विभाग (PWD) एक बार फिर भ्रष्टाचार और बेअदबी के गंभीर आरोपों से घिरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त आदेश दिए थे कि विभाग में ट्रांसफर नीति के तहत किसी भी इंजीनियर—चाहे वह जेई (जूनियर इंजीनियर) हो या एई (असिस्टेंट इंजीनियर)—का तबादला नहीं किया जाएगा।यहां तक कि जिन लोगो की काउंसलिंग हो चुकी थी उनका भी तबादला रोक दिया गया था यह फैसला इसलिए लिया गया था ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे और वर्षों से चल रहा ‘तबादला उद्योग’ पूरी तरह खत्म हो।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
PWD मुख्यालय से जुड़े सूत्रों और हमारे पास मौजूद प्रमाणिक दस्तावेजों के मुताबिक, करीब 10 तबादले चुपचाप कर दिए गए हैं, जिनके आदेश विभाग के अंदरखाने ही तैयार हुए जबकि सीएम के आदेश के बाद हर तरह के विभाग के तबादले शून्य कर दिए गए थे यहां तक कि जिन तबादलों की कांउसिलिंग पूरी हो चुकी थी उन पर भी पूरी तरह से रोक लगाई गई है लेकिन ये जो दस तबादले किये गए किस आधार पर लिफाफा नीति कितनी मजबूत चली है इसके पीछे कौन लोग है मुख्यमंत्री कार्यालय या प्रमुख सचिव की बिना जानकारी के जारी कर दिए गए। यह न सिर्फ नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विभाग में ‘नोटों की गड्डियों’ के दम पर सिस्टम को नचा दिया गया है।
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इन तबादलों को देखकर ये साफ हो जाता है कि पीडब्ल्यूडी में बैठे कुछ ‘दीमक’ अब पूरे तंत्र को अंदर से खोखला कर चुके हैं। ये वो चेहरे हैं जिन्हें ना मुख्यमंत्री की चाबुक का डर है, ना शासन-प्रशासन की पारदर्शिता की परवाह। विभाग में ये तबादले केवल मनमानी नहीं, बल्कि सत्ता और भ्रष्टाचार के गठजोड़ की स्याह तस्वीर भी पेश करते हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशों की धज्जियाँ उड़ाना और फाइलों में खेल कर ट्रांसफर ऑर्डर निकालना यह दिखाता है कि अंदरूनी मिलीभगत कितनी मजबूत है। क्या यह सिर्फ अफसरों की साजिश है या इसमें बाबू से लेकर बड़े अफसर तक सबकी हिस्सेदारी तय है?
अब सवाल ये उठते है कि जब साफ आदेश था कि कोई तबादला नहीं होगा, तो फिर ये ट्रांसफर ऑर्डर किसके इशारे पर जारी हुए?
क्यों नहीं हो रही विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय?
और सबसे अहम—कब होगी इन फर्जी तबादलों की जांच?
लाइव न्यूज़ एक्स आपके सामने ये बड़ा और प्रमाणिक खुलासा इसलिए ला रहा है ताकि प्रदेश की जनता जान सके कि “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” का जो सपना दिखाया जा रहा है, उसे नौकरशाही ने कैसे तार-तार कर दिया है।
अगर इस पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में ये सिस्टम केवल घोटालों और झूठे वादों का जंगल बनकर रह जाएगा।
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