बिजली निजीकरण आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले दो अभियंताओं — ललित सिंह और एक अन्य अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। विजिलेंस विभाग की जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। दोनों अभियंताओं पर लगभग 66 लाख रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित करने और 75 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप है।
गौरतलब है कि ललित सिंह और उनके सहयोगी लंबे समय से बिजली विभाग में निजीकरण के खिलाफ आंदोलन का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष की संपत्तियों की भी जांच की मांग उठाई थी, जिसे लेकर विभाग में हलचल मच गई थी। अब उनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं
कर्मचारी महासंघ ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है और इसे प्रतिशोध की भावना से प्रेरित बताया है। महासंघ के अनुसार, यह कार्रवाई सिर्फ इसलिए की गई है क्योंकि अभियंताओं ने उच्च अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए थे। महासंघ ने साफ कहा है कि जब तक उचित कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई नहीं होती, तब तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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महासंघ का यह भी कहना है कि सत्ता में बैठे लोग यदि सवाल उठाने वालों को ही निशाना बनाएंगे, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता के खिलाफ है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके और आंदोलनकारी अधिकारियों के साथ न्याय हो।
इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कर्मचारियों के बीच चिंता और असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि यदि ऐसी कार्रवाइयाँ इसी तरह चलती रहीं तो आगे और अधिकारी आंदोलन से पीछे हट सकते हैं, जिससे बिजली निजीकरण के खिलाफ चल रहे जनहित आंदोलनों को भारी नुकसान पहुंचेगा।
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