back to top
Thursday, May 7, 2026
24 C
Lucknow
Homeबड़ी खबरसांसद इकरा हसन से एडीएम का अभद्र व्यवहार !

सांसद इकरा हसन से एडीएम का अभद्र व्यवहार !

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गरम सियासी मामला सामने आया है, जिसमें कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने वहां के अपर जिलाधिकारी (एडीएम) पर अभद्र और अपमानजनक व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब सांसद अपने क्षेत्र की जनता की समस्याएं लेकर सहारनपुर कलेक्ट्रेट पहुंचीं और उन्हें वहां एडीएम से मुलाकात के दौरान कथित रूप से अपमानित किया गया। आरोप है कि एडीएम ने उन्हें बातचीत के दौरान झिड़कते हुए कहा, “कार्यालय से बाहर जाइए!” — और बिना बातचीत पूरी किए उन्हें बाहर जाने को कह दिया गया।

सांसद इकरा हसन इस मुलाकात के दौरान अकेली नहीं थीं। वे छुटमलपुर नगर पंचायत अध्यक्ष शमा परवीन के साथ जिला प्रशासन के सामने स्थानीय मुद्दों को उठाने गई थीं। उनका उद्देश्य था कि क्षेत्र में फैली अव्यवस्था, सफाई व्यवस्था की बदहाली, जल निकासी की समस्या, खराब सड़कों और नागरिकों की शिकायतों को लेकर प्रशासन को अवगत कराया जाए और समाधान की पहल हो। लेकिन जिस तरीके से अधिकारियों ने व्यवहार किया, उसने न केवल एक सांसद की गरिमा को ठेस पहुंचाई बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए।

अपनी शिकायत में सांसद ने मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) से गुहार लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं हुआ, बल्कि यह पूरे संसदीय क्षेत्र की आवाज का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि एडीएम का रवैया न सिर्फ अमर्यादित था बल्कि लोकतंत्र के उस बुनियादी सिद्धांत के भी खिलाफ था, जहां जनता के प्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि “अगर जनप्रतिनिधि की बात तक नहीं सुनी जाएगी, तो आम नागरिक की सुनवाई की क्या उम्मीद की जा सकती है?”

Also Read: चुनाव आयोग का नया आदेश: अब 45 दिन बाद डिलीट होंगे वीडियो, बढ़ी राजनीतिक हलचल

सांसद की शिकायत के बाद मंडलायुक्त ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए और पता लगाया जाए कि आखिरकार सच्चाई क्या है — क्या वाकई एडीएम ने पद की मर्यादा का उल्लंघन किया है या फिर यह मामला किसी प्रकार की गलतफहमी या सियासी तनाव का परिणाम है। इस मामले में एडीएम की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं।

प्रशासनिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा जोरों पर है। वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर कोई अधिकारी वाकई में इस तरह का व्यवहार करता है, तो यह न केवल जनप्रतिनिधियों का अपमान है बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को भी कमजोर करता है। दूसरी ओर, यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच हो ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया राजनीति के दबाव में न आए और दोषी चाहे जो हो, उसे सजा जरूर मिले।

इस मामले ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संतुलन और परस्पर सम्मान की आवश्यकता को फिर से सामने ला दिया है। लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ी ताकत है, और अगर संवाद ही नहीं होगा, तो समाधान की गुंजाइश भी खत्म हो जाती है। अब सभी की निगाहें इस जांच पर टिकी हैं — क्या यह मामला किसी अधिकारी की सत्ता में चढ़ी अहंकार की निशानी है या राजनीति से प्रेरित दबाव का नतीजा? सच्चाई जो भी हो, यह स्पष्ट है कि लोकतंत्र में किसी भी जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Livenewsx
Livenewsxhttp://www.livenewsx.in
we are digtal news platform.we are covering social facts politics national international news breaking
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments