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डीआरडीओ ने पीएल-15 मिसाइल के विश्लेषण के बाद मार्क-2 कार्यक्रम में उन्नत तकनीक अपनाने का निर्णय लिया

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी अस्त्र-मार्क-2 कार्यक्रम में चीनी पीएल-15 हवा-से-हवा मिसाइल की कई उन्नत विशेषताओं शामिल करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पंजाब में बरामद हुई एक अप्रयुक्त पीएल-15 मिसाइल के विस्तृत तकनीकी विश्लेषण के बाद लिया गया। उस मिसाइल को होशियारपुर के पास एक खेत से सुरक्षित हालत में पाया गया — जिससे भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों को दुर्लभ खुफिया अवसर मिला।

हिंदुस्तान टाइम्स के सूत्रों के अनुसार, बरामद पीएल-15ई का निर्यातसंस्करण भारतीय हवा-से-हवा हथियारों से भिन्न पाया गया; इसमें सेल्फ-डिस्ट्रक्ट सिस्टम न होने के कारण मिसाइल बिना विस्फोट के बरामद हुई। प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि यह मिसाइल पाकिस्तानी जेएफ-17 या जे-10सी विमान से दागी गई थी, जो लक्ष्य पर प्रभाव नहीं डाल सकी और बाद में वह भारतीय क्षेत्र में करीब सौ किलोमीटर अंदर गिरी।

डीआरडीओ ने अभी तक अपनी संपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन मामले से परिचित एक अधिकारी ने बताया कि विश्लेषण में कई उन्नत क्षमताएँ मिलीं — जिनमें मिनी एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार के साथ एडवांस्ड प्रोपल्शन, मैक-5 से अधिक गति बनाए रखने की क्षमता और मजबूत एंटी-जैमिंग तकनीक शामिल हैं। इन तकनीकी निष्कर्षों को ध्यान में रखकर भारत अपने स्वदेशी मिसाइल विकास कार्यक्रम में प्रासंगिक नवाचार जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

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