लखनऊ की लखनऊ छावनी परिषद में कार्यरत सफाई कर्मी उमेश कुमार के ट्रांसफर को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे ने अब प्रशासनिक फैसले से आगे बढ़कर सियासी रंग ले लिया है।
पूरा मामला 14 अप्रैल का बताया जा रहा है, जब अंबेडकर जयंती के मौके पर उमेश कुमार की बेटी ने अखिलेश यादव को भंडारे का प्रसाद खिलाया था। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रहे।
इसके कुछ समय बाद उमेश कुमार को सुरक्षा निगरानी के कार्य से हटाकर दोबारा सफाई कार्य में लगा दिया गया, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया।
अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को भाजपा सरकार की “दमनकारी राजनीति” बताते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से कर्मचारी को निशाना बनाया गया है।
दूसरी ओर लखनऊ छावनी परिषद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह फैसला पूरी तरह प्रशासनिक और नियमों के आधार पर लिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि उमेश कुमार के खिलाफ पहले से कुछ शिकायतें थीं और उन्होंने बिना अनुमति उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर सेवा नियमों का उल्लंघन किया था।
छावनी परिषद के मुताबिक सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रिया और अनुशासन का पालन करना जरूरी होता है, इसलिए कार्रवाई नियमों के तहत की गई।
इस मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्ष इसे सामाजिक और राजनीतिक दबाव का मामला बता रहा है, जबकि प्रशासन इसे नियमित विभागीय कार्रवाई कह रहा है।
कुल मिलाकर, एक कर्मचारी के तबादले का मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां प्रशासनिक नियम और राजनीतिक आरोप आमने-सामने नजर आ रहे हैं।
written by :- Anjali Mishra
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