हालिया आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका नहीं, बल्कि सऊदी अरब वह देश है जिसने सबसे ज्यादा भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया है। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में दी। रिपोर्ट में बताया गया कि 2021 से 2025 के बीच सबसे अधिक भारतीय नागरिक सऊदी अरब से वापस भेजे गए। इस अवधि में डिपोर्टेशन के मामले लगातार बढ़ते दिखाई दिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी देशों में डिपोर्टेशन का कारण अक्सर सीमा पार का उल्लंघन नहीं होता। बल्कि ज्यादातर मामलों में भारतीय नागरिकों के वीजा नियम तोड़ने, श्रम कानूनों का पालन न करने और काम की शर्तों की अनदेखी करना पाया गया। यानी नियमों का पालन न करना भारतीयों के लिए भारी पड़ा और उन्हें अपने देश लौटना पड़ा।
सऊदी अरब में भारतीय प्रवासी आमतौर पर निर्माण, सेवा और घरेलू श्रम क्षेत्रों में काम करते हैं। इन क्षेत्रों में नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई बार कार्यदाताओं की शिकायतों के कारण प्रवासी भारतीयों पर कार्रवाई होती है, जिससे उन्हें डिपोर्ट होना पड़ता है।
भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और भारतीय नागरिकों को वहां के नियमों का पालन करने की चेतावनी दी है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास भारतीय नागरिकों को नियमों के पालन और उचित जानकारी देने में लगातार सहायता कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, डिपोर्टेशन के मामलों में अवैध तरीके से सीमा पार करने वाले भारतीयों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसका मतलब साफ है कि अधिकांश भारतीय वहां काम करने के वैध तरीकों का उपयोग करते हुए भी कभी-कभी नियमों की अनदेखी कर देते हैं।
सऊदी अरब में डिपोर्टेशन का मुद्दा प्रवासी भारतीयों और उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गया है। परिवार और समाज पर इसका प्रभाव भी पड़ता है, क्योंकि डिपोर्ट होने के बाद उन्हें नए रोजगार और रहने की व्यवस्था करना पड़ती है।
सरकार ने यह सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं कि भारतीय नागरिकों को विदेश में सुरक्षित और कानूनी तरीके से काम करने के लिए मार्गदर्शन मिले। इसके तहत वीजा नियम, श्रम कानून और स्थानीय प्रशासन की जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासियों की जागरूकता बढ़ाने और नियमों का सही पालन कराने से डिपोर्टेशन के मामलों में कमी लाई जा सकती है। इसके लिए भारत सरकार और सऊदी अरब प्रशासन के बीच सहयोग भी बढ़ाया जा रहा है।
इस पूरी स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विदेश में काम करने के दौरान नियमों की अनदेखी सबसे बड़ी चुनौती है। भारतीय नागरिकों के लिए यह संदेश है कि विदेश में सुरक्षित और स्थायी जीवन के लिए नियमों का पालन अनिवार्य है।
( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )
