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राफेल और सबमरीन डील से बढ़ेगा भारत का रक्षा बल, मैक्रोन ने बताया ‘मेक इन इंडिया’ का महत्व

फ्रांस के राष्ट्रपति एम्मानुएल मैक्रॉन ने कहा है कि भारत का 114 राफेल जेट्स का बड़ा सौदा दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस सौदे से भारत में नौकरियों का सृजन होगा और “मेक इन इंडिया” पहल के तहत जेट्स और उनके उपकरणों का अधिक हिस्सा देश में ही निर्मित किया जाएगा।

मैक्रोन ने स्पष्ट किया, “राफेल बहुत अहम है। हम चाहते हैं कि यह सफलता सबमरीन प्रोजेक्ट में भी मिले। हमने नई क्षमता भी पेश की है।” उनका यह बयान भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को और मजबूती देने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

वर्तमान में भारत ने कुल 36 राफेल जेट्स एयरफोर्स के लिए खरीदे हैं और 26 नेवी वर्ज़न के लिए ऑर्डर किया है। यह सौदा भारतीय वायु सेना और नौसेना की सामरिक ताकत को कई गुना बढ़ाने वाला है। इन जेट्स के आने से भारत की हवाई और समुद्री सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।

साथ ही, तीन नई स्कॉर्पीन सबमरीन भारत में बनेंगी, जो मोजागों डॉक और फ्रांस की नवल ग्रुप के सहयोग से तैयार की जाएंगी। इससे भारत की नौसैनिक क्षमता में काफी वृद्धि होगी और इंडियन ओशन में देश की प्रभुत्व स्थिति और सशक्त होगी।

मैक्रोन ने यह भी बताया कि इस सहयोग में तकनीकी हस्तांतरण और स्थानीय निर्माण पर जोर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि भारत सिर्फ उपकरण खरीद नहीं रहा, बल्कि रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों को भी नई ऊंचाई देगा। यह साझेदारी भविष्य में अन्य रक्षा और तकनीकी प्रोजेक्ट्स के लिए रास्ता खोलेगी।

भारत के लिए यह सौदा राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित होगा। स्थानीय उद्योगों और श्रमिकों को उत्पादन में शामिल करके रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रक्षा उत्पादन में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

राफेल जेट्स और स्कॉर्पीन सबमरीन के संयोजन से भारत की बहुआयामी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। हवाई, समुद्री और भूमि पर सामरिक संतुलन बनाए रखना अब और आसान होगा, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा की चुनौती में भारत अधिक सक्षम बनेगा।

आने वाले वर्षों में यह सौदा दोनों देशों की रणनीतिक दोस्ती को और मजबूत करेगा और भारत को वैश्विक रक्षा मानचित्र पर एक प्रभावशाली खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। यह सहयोग “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

written by :-Shivendra Tiwari

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