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रामायण की धुनों में आस्था, संस्कार और सिनेमा का संगम !

रणबीर कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘रामायण’ पहले ही अपने भव्य स्केल और कास्ट को लेकर चर्चा में है, लेकिन अब इसके म्यूजिक ने दर्शकों की उत्सुकता को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया है। वजह है एआर रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज कंपोज़र हंस ज़िमर का साथ आना। जब भारतीय आत्मा और पश्चिमी सिनेमाई भव्यता एक साथ मिलती है, तो उम्मीदें अपने आप कई गुना बढ़ जाती हैं।

एआर रहमान ने हाल ही में इस फिल्म से अपने भावनात्मक जुड़ाव पर खुलकर बात की और उनके शब्दों ने लोगों को छू लिया। उन्होंने बेहद सादगी से कहा कि भले ही वह मुस्लिम हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई एक ब्राह्मण स्कूल में हुई, जहां रामायण और महाभारत हर साल पढ़ाई जाती थी। यही वजह है कि ये कहानियां उनके लिए सिर्फ ग्रंथ नहीं, बल्कि बचपन की यादों और संस्कारों का हिस्सा हैं।

रहमान के मुताबिक रामायण को केवल धर्म के चश्मे से देखना उसकी व्यापकता को सीमित करना है। उनके लिए यह एक ऐसे इंसान की कहानी है, जो मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और करुणा जैसे मूल्यों पर चलता है। यही वो बातें हैं जो किसी भी समय और समाज में इंसान को बेहतर बनाती हैं, और शायद इसी वजह से रामायण आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि दुनिया चाहे जितनी बहस करे, उनका फोकस उन मूल्यों पर है जो मानवता को ऊपर उठाते हैं। रामायण उन्हें इसलिए आकर्षित करती है क्योंकि यह अच्छाई, धैर्य और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है। यही सोच उनके संगीत में भी झलकती है, जहां भावनाएं शब्दों से पहले दिल तक पहुंचती हैं।

हंस ज़िमर के साथ उनका यह सहयोग फिल्म के म्यूजिक को ग्लोबल लेवल पर ले जाने वाला माना जा रहा है। ज़िमर की ऑर्केस्ट्रल ग्रैंडनेस और रहमान की भारतीय आत्मा जब एक साथ मिलेंगी, तो रामायण का संगीत सिर्फ सुनने का अनुभव नहीं, बल्कि महसूस करने का सफर बन सकता है। यह कोलैब अपने आप में सिनेमा इतिहास का एक खास पल माना जा रहा है।

रणबीर कपूर की ‘रामायण’ में संगीत सिर्फ बैकग्राउंड नहीं होगा, बल्कि कहानी की आत्मा बनेगा। राम, सीता, वनवास, युद्ध और करुणा—हर भाव को सुरों के जरिए और गहराई से दिखाने की कोशिश होगी। ऐसे में रहमान का यह भावनात्मक जुड़ाव फिल्म को और सच्चा और असरदार बना सकता है।

दर्शकों के लिए यह बात भी खास है कि रहमान ने किसी पहचान या धार्मिक दायरे से ऊपर उठकर इस कहानी को अपनाया है। उनका नजरिया यह याद दिलाता है कि महान कथाएं सीमाओं में नहीं बंधतीं, बल्कि पीढ़ियों और संस्कृतियों को जोड़ती हैं। शायद यही वजह है कि रामायण हर कलाकार को किसी न किसी स्तर पर अपनी कहानी लगती है।

अब जब फिल्म का म्यूजिक दो दिग्गजों के हाथ में है और उसके पीछे इतनी गहरी भावना जुड़ी है, तो दर्शकों की उम्मीदें अपने आप आसमान छू रही हैं। रहमान के शब्द और उनका यह दृष्टिकोण साफ संकेत देते हैं कि ‘रामायण’ का संगीत सिर्फ कानों में नहीं, दिल और आत्मा में उतरने वाला है। यही वजह है कि यह फिल्म रिलीज से पहले ही एक यादगार अनुभव बनने की ओर बढ़ रही है।

written by :- Anjali Mishra

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